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सबसे पहले तो मैं Sex Stories अन्तर्वासना सेक्स स्टोरीज साईट को धन्यवाद कहना चाहूँगा कि उन्होंने हमें अपने उदास और वीरान जीवन में अन्तर्वासना की रंगीनियाँ भरने का मौका दिया. मैं पिछले दो सालों से अन्तर्वासना को रोज़ ही देखता हूँ. कुछ कहानियाँ तो अच्छी होती हैं पर कुछ तो बिल्कुल ही बकवास होती हैं जिन्हें सिर्फ और सिर्फ समय की बर्बादी ही कहा जा सकता है. खैर जो भी हो, सब चलता है…
मैं अपना परिचय करवा दूँ! मेरा नाम कुमार है, उम्र अभी 26 साल है. वैसे तो मैं कोलकाता का रहने वाला हूँ पर जॉब की वजह से अभी दिल्ली में हूँ. मैं साधारण कद काठी का हूँ पर बचपन से ही जिम जाता हूं इसलिए अभी भी मेरी बॉडी अच्छे आकार में है . बाकी बॉडी के बारे में धीरे धीरे पता चल जायेगा.
मैं जो कहानी आपसे बाँटने जा रहा हूँ वो सच्ची है या झूठी, यह आप ही तय करना.
बात उन दिनों की है जब मैंने अपनी स्नातिकी पूरी की थी. उस वक़्त मेरी उम्र 21 थी. मैं अपने मम्मी-पापा और अपनी बड़ी बहन के साथ कोलकाता में एक किराये के मकान में रहता था. मेरे पापा उस वक़्त सरकारी जॉब में थे. माँ घर पर ही रहती थीं और हम भाई-बहन अपनी अपनी पढ़ाई में लगे हुए थे. मेरी और मेरी बहन की उम्र में बस एक साल का फर्क है. इसलिए हम दोस्त की तरह रहते थे. हम दोनों अपनी सारी बातें एक दूसरे से कर लेते थे, चाहे वो किसी भी विषय में हो.
मैं बचपन से ही थोड़ा ज्यादा सेक्सी था और सेक्स की किताबों में मेरा मन कुछ ज्यादा लगता था. पर मैं अपनी पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहता था इसलिए मुझसे सारे लोग काफी खुश रहते थे.
हम जिस किराये के मकान में रहते थे उसमें दो हिस्से थे, एक में हम और दूसरे में एक अन्य परिवार रहता था, जिसमें एक पति-पत्नी और उनके दो बच्चे रहते थे. दोनों काफी अच्छे स्वभाव के थे और हमारे घर-परिवार में मिलजुल कर रहते थे. मेरी माँ उन्हें बहुत प्यार करती थीं. मैं भी उन्हें अपनी बड़ी बहन की तरह ही मानता था और उनके पति को जीजा कहता था. उनके बच्चे मुझे मामा मामा कहते थे.
सब कुछ ठीक ठाक ही चल रहा था. अचानक मेरे पापा की तबीयत कुछ ज्यादा ही ख़राब हो गई और उन्हें अस्पताल में दाखिल करवाना पड़ा. हम लोग तो काफी घबरा गए थे पर हमारे पड़ोसी यानि कि मेरे मुँहबोले जीजाजी ने सब कुछ सम्हाल लिया. हम सब लोग अस्पताल में थे और डॉक्टर से मिलने के लिए बेताब थे. डॉक्टर ने पापा को चेक किया और कहा की उनके रीढ़ की हड्डी में कुछ परेशानी है और उन्हें ऑपरेशन की जरूरत है. हम लोग फ़िर से घबरा गए और रोने लगे. जीजाजी ने हम लोगों को सम्हाला और कहा कि चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है सब ठीक हो जायेगा. उन्होंने डॉक्टर से सारी बात कर ली और हम सब को घर जाने के लिए कहा. पहले तो हम कोई भी घर जाने को तैयार नहीं थे पर बहुत कहने पर मैं, मेरी बहन और अनीता दीदी मान गए, अनीता मेरी मुँहबोली बहन का नाम था.
हम तीनों लोग घर वापस आ गए. रात जैसे तैसे बीत गई और सुबह मैं अस्पताल पहुँच गया. वहाँ सब कुछ ठीक था. मैंने डॉक्टर से बात की और जीजा जी से भी मिला. उन लोगों ने बताया कि पापा की शूगर थोड़ी बढ़ी हुई है इसलिए हमें थोड़े दिन रुकना पड़ेगा, उसके बाद ही उनकी सर्जरी की जायेगी. बाकी कोई घबराने वाली बात नहीं थी. मैंने माँ को घर भेज दिया और उनसे कहा कि अस्पताल में रुकने के लिए जरूरी चीजें शाम को लेते आयें. माँ घर चली गईं और मैं अस्पताल में ही रुक गया. जीजा जी भी अपने ऑफिस चले गए.
जैसे-तैसे शाम हुई और माँ सारी चीजें लेकर वापस अस्पताल आ गईं. हमने पापा को एक निजी कमरे में रखा था जहाँ एक और बिस्तर था परिचारक के लिए. माँ ने मुझसे घर जाने को कहा. मैं अस्पताल से निकला और टैक्सी स्टैंड पहुँच गया. मैंने वहाँ एक सिगरेट ली और पीने लग. तभी मेरी नज़र वहीं पास में एक बुक-स्टाल पर चली गई. मैंने पहले ही बताया था कि मुझे सेक्सी किताबें, खासकर मस्त राम की किताबों का बहुत शौक है. मैं उस बुक-स्टाल पर चला गया और कुछ किताबें खरीदी और अपने घर के लिए टैक्सी लेकर निकल पड़ा.
घर पहुंचा तो मेरी बहन ने जल्दी से आकर मुझसे पापा के बारे में पूछा और तभी अनीता दीदी भी अपने घर से बाहर आ गईं और पापा की खबर पूछी. मैंने सब बताया और बाथरूम में चला गया. सारा दिन अस्पताल में रहने के बाद मुझे फ्रेश होने की बहुत जल्दी पड़ी थी. मैं सीधा बाथरूम में जाकर नहाने लगा. बाथरूम में जाने से पहले मैंने मस्तराम की किताबों को फ़्रिज पर यूँ ही रख दिया. हम दोनों भाई बहन ही तो थे केवल इस वक़्त घर पर, और उसे पता था मेरी इस आदत के बारे में. इसलिए मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया.
जब मैं नहा कर बाहर आया तो मेरी बहन को देखा कि वो किताबें देख रही है. उसने मुझे देखा और थोड़ा सा मुस्कुराई. मैंने भी हल्की सी मुस्कान दी और मैं अपने कमरे में चला गया. मैं काफी थक गया था इसलिए बिस्तर पर लेटते ही मेरी आँख लग गई.
रात के करीब 11 बजे मुझे मेरी बहन ने उठाया और कहा- खाना खा लो!
मैं उठा और हाथ मुँह धोकर खाने के लिए मेज़ पर गया, वहाँ अनीता दीदी भी बैठी थी. असल में आज खाना अनीता दीदी ने ही बनाया था. मैंने खाना खाना शुरू किया और साथ ही साथ टीवी चला दिया. हम इधर उधर की बातें करने लगे और खाना खा कर टीवी देखने लगे.
हम तीनों एक ही सोफे पर बैठे थे, मैं बीच में और दोनों लड़कियाँ मेरे आजू-बाजू . काफी देर बात चीत और टीवी देखने के बाद हम लोग सोने की तैयारी करने लगे. मैं उठा और सीधे फ़्रिज की तरफ गया क्यूंकि मुझे अचानक अपने किताबों की याद आई. मुझे वहाँ पर बस एक ही किताब मिली जबकि मैं तीन किताबें लेकर आया था. सामने ही अनीता दीदी बैठी थी इसलिए कुछ पूछ भी नहीं सकता था अपनी बहन से. खैर मैंने सोचा कि जब अनीता दीदी अपने घर में चली जाएँगी तो मैं अपनी बहन से पूछूंगा.
थोड़ी देर तक तो मैं अपने कमरे में ही रहा, फिर उठ कर बाहर हॉल में आया तो देखा मेरी बहन अपने कमरे में सोने जा रही थी, मैंने उसे आवाज़ लगाई- नेहा, मैंने यहाँ तीन किताबें रखी थीं, एक तो मुझे मिल गई लेकिन बाकी दो और कहाँ हैं?”
“मेरे पास हैं, पढ़कर लौटा दूंगी मेरे भैया!” और उसने बड़ी ही सेक्सी सी मुस्कान दी.
मैंने कहा- लेकिन तुम्हें दो दो किताबों की क्या जरूरत है? एक रखो और दूसरी लौटा दो, मुझे पढ़नी है.
उसने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया और बस कहा कि आज नहीं कल दोनों ले लेना.
मैं अपना मन मारकर अपने कमरे में गया और किताब पढ़ने लगा. पढ़ते-पढ़ते मैंने अपना लण्ड अपनी पैन्ट से बाहर निकला और मुठ मारने लगा. काफी देर तक मुठ मारने के बाद मैं झड़ गया और अपने लण्ड को साफ़ करके सो गया.
रात को अचानक मेरी आँख खुली तो मैं पानी लेने के लिए हॉल में फ़्रिज के पास पहुंचा. जैसे ही मैंने फ़्रिज खोला कि मुझे बगल के कमरे से किसी के हंसने की आवाज़ सुनाई दी. मैंने ध्यान दिया तो पता लगा कि मेरी बहन के कमरे से उसकी और किसी और लड़की की आवाज़ आ रही थी. नेहा का कमरा हॉल के पास ही है. मैं उसके कमरे के पास गया और अपने कान लगा दिए ताकि मैं यह जान सकूँ कि अन्दर कौन है और क्या बातें हो रही हैं.
जैसे ही मैंने अपने कान लगाये मुझे नेहा के साथ वो दूसरी आवाज़ भी सुनाई दी. गौर से सुना तो वो अनीता दीदी थी. वो दोनों कुछ बातें कर रहे थे. मैंने ध्यान से सुनने की कोशिश की, और जो सुना तो मेरे कान ही खड़े हो गए.
अनीता दीदी नेहा से पूछ रही थी- हाय नेहा, ये कहाँ से मिली तुझे? ऐसी किताबें तो तेरे जीजा जी लाते थे पहले, जब हमारी नई-नई शादी हुई थी!
“अच्छा तो आप पहले भी इस तरह की किताबें पढ़ चुकी हैं?”
“हाँ, मुझे तो बहुत मजा आता है. लेकिन अब तेरे जीजू ने लाना बंद कर दिया है. और तुझे तो पता है कि मैं थोड़ी शर्मीली हूँ इसलिए उन्हें फिर से लाने को नहीं कह सकती, और वो हैं कि कुछ समझते ही नहीं.”
“कोई बात नहीं दीदी, जब भी आपको पढ़ने का मन करे तो मुझसे कहना, मैं आपको दे दूंगी.”
“लेकिन तेरे पास ये आई कहाँ से?”
“अब छोड़ो भी न दीदी, तुम बस आम खाओ, पेड़ मत गिनो.”
“पर मुझे बता तो सही!”
“लगता है तुम नहीं मानोगी!”
“मैं कितनी जिद्दी हूँ, तुझे पता है न. चल जल्दी से बता!”
“तुम पहले वादा करो कि तुम किसी को भी नहीं बताओगी!”
“अरे बाबा, मुझ पर भरोसा रखो, मैं किसी को भी नहीं बताऊँगी.”
“ये किताबें सोनू लेकर आता है.”
“हे भगवान्…” अनीता दीदी के मुँह से एक हल्की सी चीख निकल गई- तू सच कह रही है? सोनू लेकर आता है?
नेहा उनकी शकल देख रही थी- तुम इतना चौंक क्यूँ रही हो दीदी?”
अनीता दीदी ने एक लम्बी साँस ली और कहा- यार, मैं तो सोनू को बिल्कुल सीधा-साधा और शरीफ समझती थी. मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा कि वो ऐसी किताबें भी पढ़ता है.”
“इसमें कौन सी बुराइ है दीदी, आखिर वो भी मर्द है, उसका भी मन करता होगा!”
“हाँ यह तो सही बात है!” दीदी ने मुस्कुराते हुए कहा- लेकिन एक बात बता, ये किताब पढ़कर तो सारे बदन में हलचल मच जाती है, फिर तुम लोग क्या करते हो? कहीं तुम दोनों आपस में ही तो…??”
अनीता दीदी की आवाज़ में एक अजीब सा उतावलापन था. उन्हें शायद ऐसा लग रहा था कि हम भाई-बहन आपस में ही चुदाई का खेल न खेलते हों.
इधर उन दोनों की बातें सुनकर मेरी आँखों की नींद ही गायब हो गई. मैंने अब हौले से अन्दर झांका और उन्हें देखने लगा. वो दोनों बिस्तर पर एक दूसरे के साथ लेटी हुई थी और दोनों पेट के बल लेट कर एक साथ किताब को देख रही थीं.
तभी दीदी ने फिर पूछा- बोल न नेहा, क्या करते हो तुम दोनों?” अनीता दीदी ने नेहा की बड़ी बड़ी चूचियों को अपने हाथो से मसल डाला.
“ऊँह, दीदी…क्या कर रही हो? दर्द होता है..” नेहा ने अपने उरोजों को अपने हाथों से सहलाया और अनीता दीदी की तरफ देख कर मुस्कारने लगी.
अनीता दीदी की आँखों में एक शरारत भरी चमक थी और एक सवाल था… नेहा ने उनकी तरफ देखा और कहा- आप जैसा सोच रही हैं वैसा नहीं है दीदी. हम भाई-बहन चाहे जितने भी खुले विचार के हों, पर हमने आज तक अपनी मर्यादा को नहीं लांघा है. हमारा रिश्ता आज भी वैसे ही पवित्र है जैसे एक भा बहन का होता है.”
यह सच भी है, हम भाई-बहन ने कभी भी अपनी सीमा को लांघने की कोशिश नहीं की थी. खैर, अनीता दीदी ने नेहा के गलों पर एक चुम्बन लिया और कहा- मैं जानती हूँ नेहा, तुम दोनों कभी भी ऐसी हरकत नहीं करोगे.”
“अच्छा नेहा एक बात बता, जब तू यह किताब पढ़ती है तो तुझे मन नहीं करता कि कोई तेरे साथ कुछ करे और तेरी चूत को चोद-चोद कर शांत करे, उसकी गर्मी निकाले?” अनीता दीदी के चेहरे पर अजीब से भाव आ रहे थे जो मैंने कभी भी नहीं देखा था. उनकी आँखे लाल हो गई थीं.
“हाय दीदी, क्या पूछ लिया तुमने, मैं तो पागल ही हो जाती हूँ. ऐसा लगता है जैसे कहीं से भी कोई लंड मिल जाये और मैं उसे अपनी चूत में डाल कर सारी रात चुदवाती रहूँ!”
“फिर क्या करती हो तुम?”
नेहा ने एक गहरी सांस ली और कहा- बस दीदी, कभी कभी उंगली या मोमबत्ती से काम चला लेती हूँ!”
दीदी ने नेहा को अपने पास खींच लिया और उसके होठों पर एक चुम्मा धर दिया. नेहा को भी अच्छा लगा. दोनों ने एक दूसरे को पकड़ लिया और सहलाना शुरू कर दिया.
यहाँ बाहर मेरी हालत ऐसी हो रही थी जैसे मैं तेज़ धूप में खडा हूँ, मैं पसीने पसीने हो गया था और मेरे लंड की तो बात ही मत करो एक दम खड़ा होकर सलामी दे रहा था. मैंने फिर उनकी बातें सुननी शुरू कर दी.
तभी अचानक मैंने देखा कि अनीता दीदी ने नेहा की टी-शर्ट के अन्दर अपना हाथ डाल दिया और उसकी चूचियों को पकड़ लिया और धीरे धीरे सहलाने लगी. नेहा को बहुत मजा आ रहा था. उसके मुँह से प्यार भरी सिस्कारियाँ निकल रही थी.
“ऊफ दीदी… मुझे कुछ हो रहा है… आपकी उँगलियों में तो जादू है.”
फिर अनीता दीदी ने पूछा- अच्छा नेहा एक बात बता, तूने कभी किसी लण्ड से अपनी चूत की चुदाई करवाई है क्या?”
“नहीं दीदी, आज तक तो मौका नहीं मिला है. आगे भगवान् जाने कौन सा लण्ड लिखा है मेरे चूत की किस्मत में.” नेहा अपनी आँखें बंद करके बाते किये जा रही थी- दीदी, तुमने तो खूब चुदाई करवाई होगी अपनी, बहुत मज़े लिए होंगे जीजाजी के साथ… बताओ न दीदी कैसा मजा आता है जब सचमुच का लण्ड अन्दर जाता है तो…?”
“यह तो तुझे खुद ही महसूस करना पड़ेगा मेरी बन्नो रानी… इस एहसास को शब्दों में बताना बहुत मुश्किल है…”
“हाय दीदी मुझे तो सच में जानना है कि कैसा मजा आता है इस चूत की चुदाई में… तुमने तो बहुत मज़े किये है जीजाजी के साथ, बोलो न कैसे करते हो आप लोग? क्या जीजा जी आपको रोज़ चोदते हैं?”
तभी अनीता दीदी थोड़ा सा उदास हो गई और नेहा की तरफ देख कर कहा- अब तुझे क्या बताऊँ, तेरे जीजा जी तो पहले बहुत रोमांटिक थे . मुझे एक मिनट भी अकेला नहीं छोड़ते थे. जब भी मन किया मुझे जहाँ मर्ज़ी वहा पटक कर मेरी चूत में अपना लंड डाल देते थे और मेरी जमकर धुनाई करते थे.”
“क्या अब नहीं करते?” नेहा ने पूछा.
“अब वो पहले वाली बात नहीं रही, अब तो तेरे जिज्जाजी को टाइम ही नहीं मिलता और मैं भी अपने बच्चों में खोई रहती हूँ. आज कल तेरे जिज्जाजी मुझे बस हफ़्ते एक या दो बार ही चोदते हैं वो भी जल्दी जल्दी से, मेरी नाइटी उठा कर अपना लंड मेरी चूत में डाल कर बस 10 मिनट में ही लंड का माल चूत में झाड़ देते हैं.”
यह बात सुनकर मेरा दिमाग ठनका. मैंने पहले कभी भी अनीता दीदी को सेक्स की नज़रों से नहीं देखा था. अब मेरे दिमाग में कुछ शैतानी घूमने लगी. मैं मन ही मन उनके बारे में सोचने लगा… ऐसा सोचने से ही मेरा लंड अब बिल्कुल स्टील की रॉड की तरह खड़ा हो गया.
अनीता दीदी को उदास देख कर नेहा ने उनके गालों पर एक चुम्मा लिया और कहा- उदास न हो दीदी, अगर मैं कुछ मदद कर सकूँ तो बोलो. मैं तुम्हारे लिए कुछ भी करुँगी, मेरा वादा है तुमसे.”
दीदी हल्के से मुस्कुराई और कहा- मेरी प्यारी बन्नो, जब जरूरत होगी तो तुझसे ही तो कहूँगी, फिलहाल अगर तू मेरी मदद करना चाहती है तो बोल!”
“हाँ हाँ दीदी, तुम बोलो मैं क्या कर सकती हूँ?”
“चल आज हम एक दूसरे को खुश करते हैं और एक दूसरे का मजा लेते हैं…” नेहा थोड़ा सा मुस्कुराई और अनीता दीदी को चूम लिया.
अनीता दीदी ने नेहा को बिस्तर से उठने के लिए कहा और खुद भी उठ गई. दोनों बिस्तर पर खड़े होकर एक दूसरे के कपड़े उतारने लगी. नेहा की पीठ मेरी तरफ थी और अनीता दीदी का चेहरा मेरी तरफ. नेहा ने अनीता दीदी की नाईटी उतार दी और दीदी ने उसकी टी-शर्ट.
हे भगवान्! मेरे मुँह से तो सिसकारी ही निकल गई, आज से पहले मैंने अनीता दीदी को इतना खूबसूरत नहीं समझा था. वो बिस्तर पर सिर्फ अपनी ब्रा और पेंटी में खड़ी थी. दूधिया बदन , सुराहीदार गर्दन, बड़ी बड़ी आँखें, खुले हुए बाल और गोरे गोरे जिस्म पर काली ब्रा जिसमे उनके 36 साइज़ के दो बड़े बड़े उरोज ऐसे लग रहे थे जैसे किसी ने दो सफेद कबूतरों को जबरदस्त कैद कर दिया हो. उनकी चूचियाँ बाहर निकलने के लिए तड़प रही थीं. चूचियों से नीचे उनका सपाट पेट और उसके थोड़ा सा नीचे गहरी नाभि, ऐसा लग रहा था जैसे कोई गहरा कुँआ हो. उनकी कमर 26 से ज्यादा किसी भी कीमत पर नहीं हो सकती. बिल्कुल ऐसी जैसे दोनों पंजो में समां जाये. कमर के नीचे का भाग देखते ही मेरे तो होंठ और गला सूख गया. उनकी गांड का साइज़ 36-37 के लगभग था. बिल्कुल गोल और इतना ख़ूबसूरत कि उन्हें तुंरत जाकर पकड़ लेने का मन हो रहा था. कुल मिलाकर वो पूरी सेक्स की देवी लग रही थीं…
हे भगवान् मैंने आज से पहले उनके बारे में कभी भी नहीं सोचा था.
इधर नेहा के कपड़े भी उतार चुकी थी और वो भी ब्रा और पेंटी में आ चुकी थी. उसका बदन भी कम सेक्सी नहीं था. 32 / 26/ 34…वो भी ऐसी थी किसी भी मर्द के लंड को खड़े खड़े ही झाड़ दे.
“हाय नेहा, तू तो बड़ी खूबसूरत है रे, आज तक किसी ने भी तुझे चोदा कैसे नहीं. अगर मैं लड़का होती तो तुझे जबरदस्ती पटक कर तुझे चोद देती.”
“ओह दीदी, आप के सामने तो मैं कुछ भी नहीं, पता नहीं जिज्जाजी आपको क्यूँ नहीं चोदते ..”
“उनकी बातें छोडो, वो तो हैं ही बेवकूफ!” अनीता दीदी ने नेहा की ब्रा खोल दी और नेहा ने भी हाथ बढ़ा कर दीदी की ब्रा का हुक खोल दिया.
मेरी तो सांस ही रुक गई, इतने सुन्दर और प्यारे उरोज मैंने आज तक नहीं देखे थे. अनीता दीदी के दो बच्चे थे पर कहीं से भी उन्हें देख कर ऐसा नहीं लगता था कि दो-दो बच्चों ने उनकी चूचियों से दूध पिया होगा…
खैर, अब नेहा की बारी थी तो दीदी ने उसकी ब्रा का हुक भी खोल दिया और साथ ही साथ उसकी पेंटी को भी उसके बदन से नीचे खिसकाने लगी. दीदी का उतावलापन देख कर ऐसा लग रहा था जैसे उन्हें कई जन्मों की प्यास हो.
नेहा ने भी वैसी ही फुर्ती दिखाई और अनीता दीदी के पेंटी को हाथों से निकालने के लिए खींच दिया. संगेमरमर जैसी चिकनी जांघों के बीच में फूले हुए पावरोटी के जैसे बिल्कुल चिकनी और गोरी चूत को देखते ही मेरे लंड ने अपना माल छोड़ दिया.
मेरे होठों से एक सेक्सी सिसकारी निकली आर मैंने दरवाज़े पर ही अपना सारा माल गिरा दिया…मेरे मुँह से निकली सिसकारी थोड़ी तेज़ थी, शायद उन लोगों ने सुन ली थी, मैं जल्दी से आकर अपने कमरे में लेट गया और सोने का नाटक करने लगा. कमरे की लाइट बंद थी और दरवाज़ा थोड़ा सा खुला ही था. बाहर हॉल में हल्की सी लाइट जल रही थी जिसमें मैंने एक साया देखा. मैं पहचान गया. यह नेहा थी जो अपने बदन पर चादर डाल कर मेरे कमरे की तरफ ये देखने आई थी कि मैं क्या कर रहा हूँ और वो सिसकारी किसकी थी.
थोड़ी देर वहीं खड़े रहने के बाद नेहा अपने कमरे में चली गई और उसके कमरे का दरवाजा बंद हो गया, जिसकी आवाज़ मुझे अपने कमरे तक सुनाई दी. शायद जोर से बंद किया गया था. मुझे कुछ अजीब सा लगा, क्यूंकि आमतौर पर ऐसे काम करते वक़्त लोग सारे काम धीरे धीरे और शांति से करते हैं. लेकिन यह ऐसा था जैसे जानबूझ कर दरवाजे को जोर से बंद किया गया था. खैर जो भी हो, उस वक़्त मेरा दिमाग ज्यादा चल नहीं पा रहा था. मेरे दिमाग में तो बस अनीता दीदी की मस्त चिकनी चूत ही घूम रही थी.
थोड़ी देर के बाद मैं धीरे से उठा और वापस उनके दरवाज़े के पास गया, और जैसे ही मैंने अन्दर झाँका…
दोस्तो, अब मैं ये कहानी यहीं रोक रहा हूँ. मुझे पता है आपको बहुत गुस्सा आएगा, कुछ खड़े लण्ड खड़े ही रह जायेंगे और कुछ गीली चूत गीली ही रह जायेगी. पर यकीन मानिये अभी तो इस कहानी की बस शुरुआत हुई है. अगर मुझे आप लोगों ने मेरा उत्साह बढ़ाया तो मैं इस कहानी को आगे भी लिखुंगा और सबके सामने लेकर आऊँगा.
वैसे भी यह मेरी पहली कहानी है अन्तर्वासना पर, तो मुझे यह भी देखना है कि मेरी कहानी छपती भी है या नहीं और लोगो को कितनी पसंद आती है. मुझे इन्तज़ार रहेगा आपके जवाब का. अगर आपको लगे कि यह कहानी आगे बढ़े तो मुझे अपने विचार भेजें. Sex Stories
करीब एक हफ़्ते के बाद भाभी लौट कर घर आई तो हमारे Sex Stories घर मिलने चली आई, एकान्त पाते ही मैने पूछा कि कहाँ गई थी? तो उसने कहा दोपहर में घर आना वहीं पर बातें होंगी, मैं तो तुम्हें ही बताने आई थी कि मैं लौट आई हूं। दोपहर में मैं स्कूल से ही उनके घर चला गया, बेल बजाने पर भाभी ने दरवाजा खोला, मैने देखा भाभी बहुत प्रसन्न दिख रही है मैने पूछा तो उसने कहा अन्दर तो आओ मैं अन्दर सीधे बेडरूम में चला गया बेड पर छोटू सो रहा था इसलिए मैं सोफ़े पर बैठ गया।थोड़ी देर में भाभी दो कप कोफ़ी लेकर आई और मेरे से सट कर बैठ गई उसने गुलाबी रंग की सलवार कमीज पहने थी काले रंग की ब्रा ऊपर से दिख रही थी। भाभी अक्सर काली ब्रा और काली पैंटी पहनना पसन्द करती है। मैने पूछा कहा गई थी? तो उसने कहा मैं इलाहाबाद अपनी बहन के घर गई थी वो मुझसे केवल दो साल छोटी है और वो मुझसे पूरी तरह खुली हुई है मैने उसे तुम्हारे बारे में बताया तो वो कह रही थी मैं भी मिलना चाहती हूं।कोफ़ी खत्म होने के बाद मैने भाभी को अपनी तरफ़ खींचा भाभी मेरी गोद मे गिर गई मैने उसकी चूचियों को ऊपर से ही दबाने लगा तो मुझे महसूस हुअ कि साइज़ में कुछ अन्तर आ गया है, मैने पूछा तो वो हसने लगी और कहा लगता है दवा का असर हो रहा है, मैने तबतक सलवार खोल दी थी भाभी जब खड़ी हुई तो सलवार नीचे सरक गई, उसने कहा लो मैं पूरा काम किए देती हूं यह कह कर उसने अपनी कमीज भी निकाल दी फ़िर से मेरे सामने उसका भरा हुआ शरीर सामने था। मेरे लंड में तनाव भरता जा रहा था, मैने भाभी को नीचे कालीन पर लिटा कर अपने होंठों को उनके होंठों से जकड़ दिया, भाभी ने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी।ऊऊह कितना मीठा स्वाद लग रहा था, मैने अपना शरीर ढीला छोड़ दिया मैं अपने हाथों से उसके चेहरे को पकड़ रखा था उसकी लार मेरे अन्दर बह रही थी कुच देर के बाद मैने अपनी जीभ उसके अन्दर डाल दी और उसे पूरा अन्दर डाल कर चारों ओर घुमाता रहा काफ़ी देर तक हम एसा करते रहे फ़िर उसने कहा चलो ६९ करते हैं, मैने पूछा ये क्या होता है तो उसने कहा पहले अपने कपड़े उतारो तो बताती हूं। मैने अपनी पैंट और शर्ट निकाल दी और बेड के किनारे बैठ कर भाभी को कपड़े उतारते देखने लगा अब उसने अपनी ब्रा को उतार दिया और मेरे पास आ कहा चलो मैं तुम्हारी सफ़ाई कर दूं यह कह कर उन्होंने वही बोतल निकाली और उसे मेरे लंड के चारों ओर लगा दिया तो मैने कहा लाओ मैं भी तुम्हारी पूरी सफ़ाई कर दूं तो उसने कहा ये बहुत अच्छा रहेगा यह कह कर वो बेड पर लेट गई मैने उनकी पैंटी निकाल दी उसकी फ़ूली हुई बुर पर छोटे छोटे काले बाल थे मैने उंगली डाल कर बोतल से ढेर सारी क्रीम निकाल कर उसकी चूत पर लगा दिया और धीरे धीरे मालिश करने लगा मेरा लंड हिलोरे लेने लगा, मैने उसकी चूचियों को दबाना चाहा तो उसने कहा पहले क्रीम को पोंछ लो, तभी मेरी नजर उसके बगल के बालों पर पड़ी मैने कहा इसे भी साफ़ कर दूं तो बोली नहीं ये जब कुछ बड़े हो जायेंगे तो तुम्हें अच्छे लगेंगे इसे रहने दोमैं सोफ़े पर बैठ गया और हम बातें करने लगे तो भाभी ने बताया तुम्हारे भैया तो रात में कपड़े निकाल कर अपना लंड मेरी बुर में डालने की कोशिश में लगे रहते हैं उन्हे ये भी जानने की जरुरत नहीं महसूस होती कि मेरी चूत सूखी होने के कारण कितना दर्द कर रही होती है जब तक मेरी चूत गीली होती है तब तक वो अपना पानी छोड़ चुके होते हैं इस तरह मैं असन्तुष्ट रह जाती हूं। मैने भाभी से पूछा अच्छा बताओ तो जरा लेडीज़ को क्या करना अच्छा लगता है तो भाभी ने कहा ये कोई नियम की बात नहीं है सेक्स तो महसूस करने की बात है केवल महसूस करके भी सेक्स में संतुष्टि मिल सकती है, तुम निश्चिंत रहो मैं तुम्हें सब कुछ बता दूंगी तो तुम शादी के बाद अपनी बीवी को पूरी तरह सन्तुष्ट कर पाओगे, मैने कहा भाभी तुम कितनी प्यारी हो और मेरा कितना ख्याल रखती हो, भाभी ने कहा देखो सेक्स तो एक भूख की तरह है इस तो सन्तुष्ट करना ही पड़ता है, कुछ लोग अपने हाथों से अपने आपको सन्तुष्ट कर लेते हैं तो कुछ लोग बाहर किसी को खोज लेते हैं इसमें तो कोई बुराई नहीं है केवल इस बात का ध्यान रखना है कि आस पास के लोगों में ये बात पता नहीं चले क्योंकि ये सब हमारे समज में अच्छा नहीं माना जाता।बातें करते काफ़ी देर हो गई तो भाभी ने कहा चलो बाथरूम में नहा लें, हम दोनो साथ ही बाथरूम में घुस गये शोवर चला कर हम एक दूसरे से लिपट कर देर तक भीगते रहे। मैं बीच बीच में भाभी के पीठ पर हाथ फ़िरा रहा था हम दोनो ने अच्छी तरह एक दूसरे को साबुन लगा कर नहलाया। भाभी की चूचियों पर साबुन वाला हाथ रगड़ने में बहुत अच्छा लग रहा था उसने भी मेरे लंड की अच्छी तरह से रगड़ाई की, हम दोनो बाहर आ कर टोवल से अपना बदन पोंछ लिए तो भाभी ने कहा चलो एक खेल खेलते हैं, हम दोनो बेड पर लेट गै भाभी ने पोंड्स का पाउडर निकाल कर उसे मेरे बदन पर पोत दिया और एसा ही करने को कहा मैने भी उनके बदन पर पाउडर डालकर पूरे शरीर पर लगा दिया तो भाभी ने कहा चलो मेरे ऊपर लेट जाओ मैं पूरी तरह उनके ऊपर लेट गया अब हम आपस में बदन रगड़ते रहे मेरा लंड भाभी की फ़ूली हुई चूत में घुसने के लिए बेताब हो रहा थाभाभी ने कहा तुम मेरी ऊपर की तरफ़ से धीरे धीरे नीचे की तरफ़ जाओ मैने भी चूत पर पहुंच कर अपनी जीभ को चूत में घुसाना चाहा तो भाभी ने कहा अभी समय नहीं हुआ है, अब मेरा मुंह भाभी के पैर की तरफ़ था और मेरा लंड भाभी के चेहरे को छू रहा था उसने मेरा लंड अपने दोनो हाथों से पकड़ लिया और अपने मुंह में डाल दिया अपने आप मेरा मुंह भाभी की चूत से सट गया अब भाभी की चूत से रस बह रहा था मैने चूत में अपनी पूरी जीभ घुसा कर चूसने लगा भाभी भी मेरे लंड को अपने मुंह से चूस रही थी कि अचानक मेरे लंड का पानी छूट गया भाभी ने उसे पूरा पी लिया अब भाभी जोर जोर से सिसकियां ले रही थी यस और करो और करो और करो यह कहते हुए भाभी ने अपने दोनो पैरों से मेरे सिर को दबा लिया और अब भाभी ने पलटने की कोशिश शुरु कर दी अब मैं भाभी के नीचे था भाभी मेरे मुंह पर धक्के मार रही थी और उसकी चूत से गरम गरम कुछ निकल रहा था जो सीधे मेरे गले में जा रहा था
भाभी, बोले जा रही थी ओह ऊओह ओह ओह ओह अंत में भाभी मेरे ऊपर पसर गई हम एक दूसरे के ऊपर लेटे रहे भाभी का चिकना बदन बहुत ही कोमल लग रहा था मेरा मन कह रहा था कि काश ये समय खत्म ही न हो। हम दोनो एक दूसरे के बहुत करीब आ चुके थे, थोड़ी देर बाद हम उठ गये तो भाभी ने कहा अब समझ में आया कि ६९ क्या होता है, मैं भाभी से लिपट गया हम दोनो काफ़ी देर तक लिपटे ही रहे तब भाभी ने मेरे माथे को चूमते हुए कहा जानते हो जब दो लोग सेक्स करते हैं तो उनका आपस में रिश्ता बहुत मजबूत हो जाता है। काफ़ी देर हो गई थी हालांकि मन नहीं हो रहा लेकिन भाभी ने कहा अब घर जाओ नहीं तो तुम्हारी मम्मी खोजेंगी, अधूरी प्यास लिए मैं अपने घर आ गया। आगे की कहानी पार्ट ५ में। Sex Storiesमेरा नाम मोहित है. मैं देहरादून में एक बड़े वकील साहब के ऑफिस में टाईपिस्ट हूँ.
उनके तीन जूनियर वकील अस्टिटेंट थे, उनमें से एक अतुल नाम का भी वकील था, जो मेरा बॉस होता था. मैं उसी के काम को करने के लिए रखा गया था.
वो एक-दो बार मेरे साथ मेरे घर आया था.
अतुल दिलफेंक टाईप का था और उसकी उम्र भी लगभग 45 साल की थी.
उसके काफी सारे अफेयर भी थे, लेकिन उस सबसे मुझे कोई वास्ता नहीं था.
अब मैं अपनी बीवी के बारे में बताऊं, तो मेरी बीवी का नाम किरण है. उसकी हाईट 5 फीट 5 इंच है और उसका शरीर भरा हुआ है.
वो किसी फिल्म की ऐक्ट्रेस की तरह दिखती है. उसका 34-28 36 का फिगर है.
उसे सेक्स में चूत चटवाना बहुत पसंद है.
लेकिन पहले मुझे चूत चाटना जरा भी पसंद नहीं था, अब हो गया है. या यूं कहूँ कि पहले नहीं था, इसीलिए मेरी बीवी के साथ ये मामला हो गया था.
हुआ कुछ यूं कि एक दिन मैं अपने ऑफिस में गया.
लेकिन उस दिन बड़े बॉस नहीं आए थे, उनके सारे जूनियर आए हुए थे.
तभी बड़े बॉस का फान आया कि वह आज नहीं आ रहे हैं.
यह सुनकर अतुल नाम का वही जूनियर वकील तुरन्त ही ऑफिस से निकल गया.
उसके निकलते ही बॉस का फोन फिर से आया और उन्होंने कहा कि हम सब भी ऑफिस बंद करके आज छुटटी लेकर घर चले जाएं.
ये सुनते ही हम सभी भी अपने-अपने घर को निकल गए.
मेरा मन था कि आज घर जाकर बीवी के साथ सेक्स का मजा लूँ.
मैं एक किराये के घर में रहता हूँ. उसमें एक कमरा व रसोई है. वो घर भी ऐसी जगह है कि कोई आए-जाए, कुछ पता नहीं चलता क्योंकि ये कॉलोनी से थोड़ा एक ओर हट कर है.
जब मैं अपने घर पहुंचा तो मुझे अतुल वकील की बाईक मेरे घर के बाहर खड़ी मिली.
मुझे कुछ शक हुआ लेकिन सोचा मिलने आया होगा, या किसी काम से आया होगा.
ये सोचकर मैं अन्दर चला गया.
अन्दर कमरे में कोई दिखाई नहीं दिया तो मुझे थोड़ा शक हुआ.
अब मैं दबे पांव रसोई की तरफ जाने लगा.
वहां मेरी बीवी किरण वकील साहब के लिए चाय बना रही थी और वह भी वहीं खड़ा था.
यह देखकर मुझे थोड़ा अजीब लगा कि ये आदमी रसोई में क्या कर रहा है.
मैं छुप कर उन दोनों की बातें सुनने लगा.
वह मेरी बीवी से बातें कर रहा था.
अतुल- जान, बहुत दिन से तुम्हारे दूध की चाय पीने का मन था, इसलिए चला आया. तुम्हें बुरा तो नहीं लगा न?
किरण- नहीं सर, मुझे बुरा नहीं लगा. लेकिन अगर वह घर आ गए तो वह गलत समझेंगे.
अतुल- अरे तुम इतना क्यों डर रही हो, वह तो ऑफिस में है, शाम तक घर नहीं आएगा.
इतना बोलकर अतुल मेरी बीवी के पिछवाड़े पर हाथ फेरने लगा जिस पर मेरी बीवी ने ऐतराज किया.
लेकिन अतुल बोला- अरे डार्लिंग, तुम्हारी चूत का रस तो मुझे पागल बना रहा है, मैं तो बस वह रस पीने आया था.
उसकी इस बात से मैं समझ गया कि इन दोनों के बीच कुछ चल रहा है.
लेकिन मेरी बीवी किरण बोली- सर, वो सब तो ऐसे ही हो गया था लेकिन अब नहीं … मुझे डर लगता है.
तो अतुल ने कहा- किरण डियर डरो मत, तुम्हारे मुँह में मेरा लंड बहुत मजा देता है. प्लीज़ एक बार लो ना!
बस इतना बोलकर अतुल ने पीछे से मेरी बीवी के 34 साइज के मम्मों को दबाना शुरू कर दिया.
इस बार मेरी बीवी ने ना ही अतुल को इंकार किया और न ही समर्थन.
अतुल मेरी बीवी के दूध सहलाता रहा और साथ ही उसने अपने एक हाथ को साड़ी के ऊपर से ही उसकी चूत पर रख दिया.
वो साड़ी के ऊपर से ही चूत में उंगली करने लगा.
उससे मेरी बीवी को शायद मजा आने लगा और उसके मुँह से मादक कराहें निकलने लगीं.
किरण- आह … रहने दो न यार … क्यों मेरी आग भड़का रहे हो?
वो मेरी बीवी के गाल चूमता हुआ बोला- सच में किरण मेरी जान, तुम मस्त माल हो. तुम्हारे दूध तो मेरी जान ही निकाल देते हैं.
किरण- एक बार तय कर लो कि मेरे दूध ज्यादा मजा देते हैं या चूत!
अपनी पत्नी किरण के मुँह से ये सुनकर मेरी समझ में आ गया कि किरण की चूत में आग लग चुकी है और वो अब चुदे बिना नहीं रह पाएगी.
उसकी बातों से मेरे लंड में भी तनाव आने लगा और मुझे भी अपनी बीवी की चुदाई होते देखने का मन करने लगा.
उन दोनों को देखकर साफ़ लग रहा था कि मेरी बीवी को अतुल के साथ काफी मजा आ रहा था.
तभी अतुल बोला- कमरे में चलो ना किरण, मुझे तुम्हारी चूत का रस पीना है.
इतना कह कर वो मेरी बीवी के होंठों को चूसने लगा.
वो बोली- अभी मेरे होंठ तो चूसो यार. क्या इधर मजा नहीं आ रहा है?
अतुल बोला- अरे मेरी जान, तुम्हारा हर अंग का रस पीने में मजा आता है. बस इधर जगह कम है न … इसलिए कह रहा हूँ कि कमरे में चलो.
इतना कह कर अतुल ने गैस बंद करके चाय बनाना बंद कर दिया और कहा- मैं चाय नहीं, तुझे पीने आया हूँ. अपने मातहत की बीवी की लेने में जो मजा आता है, वो और कहीं नहीं आता.
मेरी बीवी अतुल का लंड पकड़ कर सहलाने लगी.
अतुल ने भी मेरी बीवी की साड़ी ब्लाउज उतार कर वहीं गैस के बगल की स्लिप में ही रख दिया.
उससे रुका नहीं गया और वो मेरी बीवी को स्लिप पर बिठाकर उसके दोनों पैरों को खोलकर उसकी टांगों के बीच में आ गया.
मेरी बीवी भी मचलने लगी.
अतुल मेरी बीवी के पेटीकोट और पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत पर धक्के मारने लगा.
वो अपने हाथों से उसकी चूचियाँ दबाता रहा और साथ ही मेरी बीवी के रसीले होंठों को चूसने लगा.
अब इस सबसे मेरी बीवी को भी मजा आने लगा था और वह भी बोलने लगी थी- आपकी पैंट में उभरे लंड को देखकर ही मुझे पहली बार ही आपके साथ करने का मन होने लगा था लेकिन आप तो बड़े तेज निकले, जो नजर देखते ही पहचान गए. आपका चूत चाटना तो मुझे पागल ही कर देता है. मेरे हसबेंड तो मेरी टपकती चूत का रस कभी चखते ही नहीं हैं. मेरा कितना मन करता है कि जैसे मैं उनका लंड चूसती हूँ, वैसे ही वह मेरी चूत भी चाटें लेकिन वह नहीं करते. जब आपने मेरी चूत चाटी, तो मुझे समझो जन्नत मिल गयी.
फिर अतुल ने कहा- चलो ना किरण, अपनी टपकती चूत को लेकर कमरे में चलो, वहां आराम से चाटूंगा भी और तुझे अच्छे से तसल्ली से चोदूँगा भी!
किरण बोली- नहीं जी, आज तो आप यहीं स्लैब पर मेरी चूत को चाटोगे और चोदोगे भी. चलो अपने घुटनों पर आ जाओ और यहीं चाटो ना. देखो कितना पानी बह रहा है!
यह सुनकर अतुल अपने घुटनों के बल बैठ गया और मेरी बीवी किरण की चूत चाटने लगा.
किरण को भी मजा आने लगा और वो भी अतुल का सर पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ने लगी.
करीब 5 मिनट तक चूत चाटने के बाद अतुल खड़ा हो गया, उसने अपना लंड निकाल कर मेरी बीवी को दिखाना शुरू कर दिया.
उसका लंड लगभग 6-7 इंच का था और मोटा भी तीन से साढ़े तीन इंच का होगा.
वो लंड हिलाता हुआ मेरी बीवी किरण से बोला- चलो डार्लिंग, अब इसे अपने मुँह में लेकर मस्त चाटो ताकि अच्छे से गीला होकर आहिस्ता से तुम्हारी चूत में चला जाए. तुम्हें याद है ना पिछली बार सूखे लंड से तुम्हें कितना दर्द हुआ था?
मेरी बीवी किरण बोली- हां, पिछली बार आपने मेरी चूत बहुत छील दी थी. आज तो मैं इसे अच्छे से अपने थूक से गीला करूंगी, जिससे मुझे भी मजा आए. पिछली बार तो बस आप ही मजे लेकर चले गए थे.
फिर मेरी बीवी किरण घुटनों पर बैठकर अतुल का लंड चूसने लगी.
करीब 5 मिनट चूसने के बाद अतुल ने मेरी बीवी को स्लिप पर ही उसके पैर चौड़े करके बिठा दिया.
फिर उसने अपना लंड मेरी बीवी की चूत पर सैट करके एक धक्का दे मारा.
जिससे मेरी बीवी चिल्ला पड़ी, किरण बोली- आह यार थोड़ा आराम से चोदो ना! … आपका बहुत मोटा है.
लेकिन अतुल ने उसकी नहीं सुनी और उसके होंठों को चूसते हुए उसकी चूत में धक्के मारता रहा.
वो मेरी बीवी को चोदने के साथ साथ कह रहा था- तुझ जैसी कमसिन कली की चूत तो रगड़ कर मारने में ही मजा आता है मेरी जान!
मेरी बीवी किरण सिसकारती रही- आह प्लीज़ … थोड़ा तो रहम करो अपने मातहत की बीवी पर … आह आगे भी तो आपको यह चूत मारनी है … प्लीज़ आह यार प्लीज़ आराम से चोद लो.
थोड़ी देर बाद चूत ने भी उसके बड़े लंड को लेने के लिए अपना मुँह और खोल लिया.
इसके बाद मेरी बीवी किरण को भी मजा आने लगा और वो अतुल को अपनी तरफ खींचने लगी.
मेरी चीटिंग वाइफ सेक्स करती रही, साथ ही कहती भी रही कि आह और जोर से मारो मेरी … मजा आ गया … और जोर से आह और जोर से … आह!
ऐसे ही तकरीबन आधा घंटा तक मेरे बॉस ने मेरी बीवी की चुदाई की और उसके बाद अपना लंड बाहर निकाल लिया.
मैं सोच में पड़ गया कि इसने ऐसा क्यों किया.
उसने मेरी बीवी से कहा- चलो नीचे आ जाओ घुटनों पर, आज मैं तुमको अपना अमृतपान करवाता हूँ. पिछली बार रह गया था.
उसकी बात को सुनकर मेरी बीवी बैठ गयी और अतुल अपने लंड पर मुठ मारने लगा.
कुछ ही देर बाद उसने अपना वीर्य मेरी बीवी के मुँह में डाल दिया जिसको मेरी बीवी ने अपने मुँह में भर लिया.
अतुल ने भी जबरदस्ती मेरी बीवी के मुँह में झड़ने के बाद अपना लंड ठूंस दिया.
जिससे मेरी बीवी को रस पीना पड़ा.
उसको वीर्य पीने में मजा भी आया. यह उसके चेहरे को देखकर साफ़ समझ आ रहा था.
अब सब खेल खत्म हो चुका था और कहीं न कहीं मुझे भी यह अच्छा लगा था.
उसके बाद मैं वहां से निकल गया और मेरे दिमाग में भी कुछ और पकने लगा था.
मेरा नाम राहुल अरोरा है। मूल-रूप से Sex Stories मैं लखनऊ से हूँ। मैं २२ साल का हूँ, रोज़ाना जिम करता हूँ इसलिए मेरा ज़िस्म बहुत मज़बूत है। सेक्स के मामले में भी मैं काफ़ी मज़बूत हूँ। अभी करीब १५ दिन पहले की घटना मैं आपको बताने जा रहा हूँ। मैं पंजाब से बी-टेक कर रहा हूँ। शुरूआत से हॉस्टल में रहता था, लेकिन दो सत्रों के बाद मैंने शहर में एक कमरा किराए पर ले लिया था।
उस मकान की मकान मालकिन का नाम मुस्कान कौर था। उसकी फ़िगर क्या बात थी! उसकी चूचियों का तो कोई जवाब ही नहीं था और जब वो चलती तो उसकी पिछाड़ी भी बड़ी सेक्सी लगती थी। उसके चूतड़ दाएँ-बाएँ हिलते थे। मैं तो उसका दीवाना हो गया था। उसकी उम्र लगभग ३५-३६ साल की होगी। उसकी एक लड़की थी, वो भी अपनी माँ पर गई थी।
मकान मालकिन का पति आर्मी में कर्नल था जो कि बहुत कम आया करता था, इसलिए वो प्यासी लगती थी, और जब भी मुझसे मिलती थी या बात करती थी तो वो बड़ी प्यासी नज़रों से देखती थी। मैं उसका इशारा समझता था, लेकिन मैंने कभी कुछ कहा नहीं। एक दिन उसकी लड़की स्कूल गई थी, और मैं उस दिन कॉलेज नहीं गया था तो उसने मुझे आवाज़ दी कि ज़रा यहाँ आना।
मैं जब उसके कमरे में गया तो वो वॉशिंग मशीन में कपड़े धो रही थी। पंजाब में सभी सलवार-सूट पहनते हैं तो उसने भी नीली रंग की सेक्सी सलवार-सूट पहन रखी थी, जिसमें उसकी चूचियाँ बड़ी ही सेक्सी लग रहीं थीं। एक बार मैंने उसे देखकर सोचा कि काश मैं इसे चोद पाता। तभी उसने कहा कि जाओ ज़रा बाज़ार से सामान ले आओ, घर में कोई नहीं है इसलिए तुम्हें कह रही हूँ, मैं भी गीली हूँ। जब भी वह झुकती तो मैं उसकी चूचियाँ देखता रहता और वो भी यह जानती थी।
मैं सामान लेने चला गया, जब सामान लेकर उसे देने गया तो वह नहाने जा रही थी। वह यह कहकर गई कि बैठो, मैं अभी आती हूँ। वो काले रंग की नाईटी में आई, और माँ क़सम, क्या गज़ब ढा रही थी। उसकी चूचियाँ साफ-साफ दिख रहीं थीं, उसने ब्रा नहीं पहनी थी। सामान देकर मैं चला गया।
उसी रात को मैंने अपने कमरे में आहट सुनी, उसने खटखटाया। मैंने दरवाज़ा खोला, उस समय रात के करीब २ बज रहे थे।
वह बोली, “मुझे नींद नहीं आ रही।”
मैंने पूछा – “क्यों?”
तो बोली – “ऐसे ही।” अचानक वह मेरे पास आकर बैठ गई,
फिर पूछती है, “तुम्हारी कोई गर्लफ्रेण्ड है क्या?”
मैंने उत्तर दिया – नहीं।”
उसने फिर पूछा, “आज तक किसी लड़की को नहीं छुआ।”
मैंने कहा, “मन तो करता है, लेकिन अभी तक नहीं।
उसने अचानक मेरा हाथ पकड़ा और किस किया। फिर वो मेरे होठों को अपने होठों से भींचने लगी। मैंने भी अपना हाथ उसकी चूचियों पर रख दिया, उसने मुझे बढ़ावा दिया, “दबाओ, ज़ोरों से दबाओ।”
दूसरा हाथ मैंने उसकी नाइटी में डाल दिया और ऊपर ले जाने लगा, उसने पैन्टी नहीं पहन रखी थी। उसने फटाफट मेरे सारे कपड़े उतार दिए और मेरा ८ इन्च का लण्ड चूसने लगी। उसने भी अपनी नाईटी उतार दी। उस समय क्या लग रही थी वो!
फिर उसने अपनी चूत चाटने को कहा, मैंने उसकी चूत चाट-चाट कर लाल कर दी, वो गर्म हो चुकी थी। उसने कहा कि राहुल अब मुझसे सहा नहीं जाता, चोद दे मुझे, प्लीज़ मुझे चोद दो। फिर मैंने अपना लण्ड उठाकर उसको चोदा। वो चीखती रही… हाय!!!!!! और चोद मेरे राजा…!!!! मैं उसकी चूचियों को खूब दबाता… तो वो और चीखती अ्अअअअ्अअअअआआआआहह्ह्ह्ह्हह्हहहह आआआआआहहहहह… और फिर करीब ३० मिनट के बाद हम दोनों झड़ गए।
उसने मुझे प्यार से गले लगाया और स्मूच्च किया। इसके बाद तो मुझे गिनती भी याद नहीं कि मैंने उसे कितनी बार चोदा।
आगे मैं उसकी लड़की की कहानी बताऊँगा। पहले आप मुझे अपने विचारों के साथ मेल करें Sex Stories
झांसी एक एतिहासिक नगर Antarvasna Sex Stories है, वहां के रहने वाले लोग भी बहुत अच्छे हैं … दूसरों की सहायता तहे दिल से करते है। मेरे पति के साथ मैं झांसी आई थी।
मेरे पति की नौकरी झांसी से लगभग 10 किलोमीटर दूर बी एच ई एल में थी, हम भोपाल से स्थानान्तरित होकर झांसी आये तो सबसे पहले हमने वहां किराये का मकान ढूंढा और जल्दी ही हमें कॉलोनी में मकान मिल भी गया। मकान मालिक ने अपने लड़के सुनील को हमारी सहायता के लिये लगा दिया था।
पहले दिन तो खाना वगैरह का इन्तजाम तो उसने ही कर दिया था। बड़ा ही हंसमुख था वो।
यह बात अलग है कि उसका इरादा आरम्भ से ही बहुत नेक था। एक जवान लड़की सामने हो तो उन्हें अपना मतलब पहले दिखने लगता था। मैं उसकी नजरें तो समझ चुकी थी पर वो ही तो एक हमारा मदद करने वाला था, उसे मैं छोड़ती कैसे भला।
एक-दो दिन में उसने हमारी घर की सेटिंग करवा दी थी और शायद वो भी अपने आप की सेटिंग मुझसे कर रहा था। उसे देख कर मुझे बड़ा ही रोमांच सा हो रहा था।
ललितपुर से सामान भी शिफ़्ट करना था। नई जगह थी सो मेरे पति ने सुनील को दो तीन दिन रात को घर पर सोने के लिये कह दिया था। उसकी तो जैसे बांछें खिल गई …
उसे मेरे समीप रहने का मौका मिल गया था। शाम को सुनील उन्हें अपनी मोटर बाईक पर बस स्टेण्ड छोड़ आया था। शाम ढल चुकी थी। जब वो लौट कर आया तो साथ में झांसी के सैयर गेट के मशहूर नॉन-वेज कवाब और बिरयानी भी ले आया था। सुनील का व्यवहार बहुत ही अच्छा था।
नये मकान में मैं घर पर अकेली थी और सुनील की नजरें मुझे आसक्ति से भरी हुई बदली हुई लग रही थी। मुझे भी अपने अकेले होने का रोमांच होने लगा था कि कहीं कोई अनहोनी ना हो जाये, जिसकी वजह से मेरा दिल भी धड़क रहा था।
जब दो भरी जवानियां अकेली हों और वो प्यासी भी हों तो मूड अपने आप बनने लगता है। मेरे दिल में भी बेईमानी भरने लगी थी, दिल में चोर था, सो मैं उससे आंखें नहीं मिला पा रही थी। उसकी तरफ़ से तो सारी तरकीबें आजमाई जा रही थी, बस मेरे फ़िसलने की देर थी।
पर मैंने मन को कठोर कर रखा था कि मैं नहीं फ़िसलूंगी। उसका लण्ड भी जाने क्या सोच सोच कर खड़ा हो रहा था जिसे मैं उसके पतले झीने पजामें में से उभार लिये हुये देख सकती थी। उसका प्यारा सा लण्ड बार बार मेरा मन विचलित किये दे रहा था। मेरा मन डोलने लगा था, मैंने अपनी रात के सोने वाली ड्रेस यानि ढीला सा गुलाबी पजामा और उस पर एक ढीला ऊंचा सा टॉप … अन्दर मैंने जानबूझ कर कोई पेण्टी या ब्रा नहीं पहनी थी। मतलब मात्र उसे मेरे स्तनों को हिला हिला कर रिझाना था, ताकि वो खुद ही बेसब्री में पहल करे। यूँ तो मेरा दिल यह सब करने को नहीं मान रहा था पर जवान जिस्म एक जवान लड़के को देख कर पिघल ही जाता है, फिर जब दोनों अकेले हों तो, और किसी का डर ना हो तो मन में यह आ ही जाता है कि मौके का फ़ायदा उठा लो … जाने ऐसा मौका फिर मिले ना मिले। आग और पेट्रोल को पास पास रख दो और यह उम्मीद करो कि कुछ ना हो।
सुनील भी मेरे पास पास ही मण्डरा रहा था। कभी तो मेरे चूतड़ों पर हाथ छुला देता था या फिर मेरे हाथों को किसी ना किसी बहाने छू लेता था। मेरे दिल में भी इन सब बातों से आग सी सुलगने लगी थी। वासना की शुरूआत होने लगी थी।
खाना भी ठीक से नहीं खाया गया। वो तो बस मेरे टॉप में से मेरे स्तनों को बार बार देखने की कोशिश कर रहा था। अब मुझे भी लग रहा था कि नीचे गले का टॉप क्यूँ पहना, पर दूसरी ओर लग रहा था कि इस टॉप को उतार फ़ेंक दूँ और अपनी नंगी चूचियाँ उसके हाथों में थमा दूँ।
रह रह कर मेरे बदन में एक वासना भरी सिरहन दौड़ जाती थी।
रात को वो मेरे कमरे में बातें करने के बहाने आ गया था, पर उसके चेहरे के नक्शे को मुझे समझने में जरा भी मुश्किल नहीं आई। वासना उसके चेहरे पर चढ़ी हुई थी। मैं बार बार नजरें चुरा कर उसके मोहक लण्ड के उभार को निहार लेती थी। बातों बातों में वो मुझे लपेटने लगा, और मैं उसकी बातों में फ़िसलने लगी।
मेरे झुकने के कारण मेरे मेरे टॉप में से स्तन भी बाहर छलके पड़ रहे थे। उसकी नजरें मेरे स्तन का जैसे नाप ले रही हो। मेरा दिल अब काबू में नहीं लग रहा था। बदन में झुरझुरी सी उठ रही थी।
“भाभी, लड़कों को लड़कियाँ इतनी अच्छी क्यूँ लगती हैं? चाहे वो शादीशुदा ही क्यूँ ना हो?”
“विपरीत सेक्स के कारण … लड़का और लड़की प्रकृति की ओर से भी एक दूसरे के लिये पूरक माने जाते हैं।” मैंने उसे उसी के तरीके से समझाया, ताकि वो मुझे ही अपना पूरक माने।
“भाभी, फिर भी लड़कियों के हाथ, पांव और जिस्म में बड़ा ही आकर्षण होता है, जैसे ये आपके ये पांव … ” सुनील ने अपना हाथ मेरे चिकने पांव पर फ़ेरते हुए कहा।
मेरा मन लरज उठा, जैसे किसी ने करण्ट लगा दिया हो। मेरी योनि में जैसे एक अजीब कुलबुलाहट सी हुई।
“अरे छू मत … मुझे कुछ होता है … !” मैंने अपने हाथ से उसका हाथ हटा दिया।
उसने मेरा हाथ पकड़ लिया। मुझे बड़ा भला सा लगा। उसके हाथ ने मेरे कोमल हाथों को हल्के से इशारा देते हुये दबा दिया।
“आपके ये हाथ कितने चिकने हैं … ! “
‘ तू क्या कर रहा है सुनील … कोई देख लेगा तो बड़ी बदनामी हो जायेगी … “
अन्दर ही अन्दर मैं पिघलने सी लगी … मैंने कोई विरोध नहीं किया।
“भाभी हम तुम तो अकेले हैं ना … कौन देखेगा … बस आप इतनी सुन्दर है तो, बदन इतना चिकना हो तो … बस एक बार हाथ से छूने दो प्लीज … !” उसका हाथ मेरे कंधे तक आ गया।
“नहीं कर ना … हाय रे … उनको पता चलेगा, मैं तो मर ही जाऊंगी … !” मैंने अपने जवाब को लगभग हां में बदलते हुये कहा, जिसे कोई भी समझ जाता। यानि कुछ भी करो पर पता नहीं चलना चाहिये।
“भाभी, भाई साहब तो ललित पुर चले गये हैं … कैसे पता चलेगा !” वो अब मेरे और पास आ गया था उसकी सांसे तेज हो उठी थी। मेरा दिल भी धाड़ धाड़ करके धड़कने लगा था।
“देख, बस हाथ ही लगाना … ” उसे मन्जूरी देते हुये कहा … मन में तो मैं अब चाह रही थी कि बस मुझे छोड़ना मत … बस चोद चोद कर मुझे निहाल कर देना।
“भाभी किसी लड़की को मैं पहली बार हाथ लगा रहा हूँ … कुछ गलती से हो जाये तो बुरा मत मानना !”
“हाय तू ये क्या कह रहा है … हाय रे ! मैं मर गई … सुनील गुदगुदी हो रही है …! ” मुझे उसके हाथ लगाते ही झटका सा लगा, पर मर्द का हाथ था … मेरी चूंचियां कड़ी होने लगी … निपल कठोर हो गये … उसका हाथ मेरी चिकनी पीठ को सहला रहा था। उसने मेरा ढीला टॉप नीचे से उठा दिया था। उसका हाथ मेरी पीठ पर फ़िसलते हुये मेरी चूंचियों को छूने लगा था। धीरे धीरे मुझे लगने लगा कि वो मेरी चूंचियाँ मसल डाले। वो अपना हाथ तो चूंचियों पर लगाता और झटका चूत पर पड़ता था, वो गीली होने लगी थी। जो पहले चुद चुकी हो उसे तो सीधे चुदने की ही लगती है ना … इतना करना तो खुलने के लिये बहुत होता है … बस यही हाल मेरा हो रहा था। उसके हाथ अब मेरी चूचियों को सहलाने में लगे थे। अब मेरा मन जल्दी से चुद जाने को कर रहा था।
“सुनील, एक बात कहूँ … ” मैंने झिझकते हुये कहा, मेरे मन उसका लण्ड पकड़ने का कर रहा था।
“जरूर कहो … बस ये सब करने के लिये मना मत करना … “
“नहीं, इसमें तो मुझे भी मजा आ रहा है … पर आपका वो … मुझे भा रहा है … क्या उसे छू लूँ … ” कह कर मैंने अपना चेहरा नीचे कर लिया। वो पहले तो समझा नहीं …
पर जब मैंने हाथ बढ़ा कर धीरे से लण्ड पकड़ लिया तो उसके मुख से आनन्द के मारे सिसकी निकल पड़ी। पर हाय रे … लण्ड तो गजब का लम्बा था। सात इन्च तो होगा ही … और मोटा … हां, उनसे ज्यादा मोटा था। उसे हाथ लगाते ही, उसकी मोटाई और लम्बाई का अहसास होने लगा। मेरा दिल धड़क उठा। मेरे मन में आया कि इतना मोटा लण्ड मेरी चूत या गाण्ड में समा जायेगा क्या ? फिर भी मेरा दिल मचल उठा उसे अपनी चूत में उसे लेने के लिये।
मैंने उसका लण्ड दबाकर ज्योंही मुठ मारी, सुनील तड़प उठा। मुझे अपने पति का लण्ड याद आ गया, सुनील का लण्ड मेरे पति के लण्ड से मोटा और लंबा था। पर वो चोदते बहुत प्यार से थे … अपना माल समझ कर … ।
अब उसने मेरी टॉप को ऊपर से खींच कर उतार दिया। पंखे की ठण्डी हवा से मेरा जिस्म सिहर उठा। मेरे कड़े निपल उसकी अंगुलियो में भिंच गये और वो उसे दबा दबा कर घुमाने लगा। मेरी चूत में उत्तेजना भरती जा रही थी। तभी मुझे ख्याल आया कि दरवाजा खुला है।
“हटो तो … दरवाजा खुला है … !” मैं लपक कर गई और दरवाजा बंद कर दिया।
“अरे कौन आयेगा … !” और उठ कर मुझे पीछे से कमर पकड़ कर भींच लिया। इसी के बीच में मुझे अहसास हुआ कि उसका लम्बा लण्ड मेरी चूतड़ों की दरारों के बीच जोर लगा रहा था, जैसे गाण्ड में घुसना चाह रहा हो। मुझे उसके अपने चूतड़ों के बीच लण्ड की मोटाई का अनुभव होने लगा था।
“अरे ये क्या कर रहे हो … बात तो बस छूने की थी … !” मैंने आनन्द लेते हुये कहा … उसके ऐसा करने से मेरे पति जब मेरी गाण्ड मारते थे, उसके आनन्द की याद ताजा हो गई थी। तभी सुनील ने मेरा पजामा नीचे जांघो तक खींच दिया और खुद का भी पाजामा नीचे खींच कर लण्ड बाहर निकाल लिया।
“हाये रे … सुनील … बस हटो … ये मत करना … !” अपने नंगे होने से मुझे बेहद आनन्द आया। किसी दूसरे मर्द के सामने नंगा होने का मजा बहुत ही प्यारा होता है।
“भाभी, प्लीज अब मत रोको मुझे … मुझसे नहीं रहा जा रहा है !” और वो अपना लण्ड मेरी चूतड़ों की चिकनी दरारों के बीचों बीच समाने लगा। चूतड़ों के पट के बीच लण्ड चीरता हुआ गाण्ड के छेद से जा टकराया।
“हाय रे, सुनील, तुम तो मेरी इज़्ज़त लूट लोगे …! ” मैंने हाथ बढ़ा कर उसके चूतड़ों को थाम कर अपनी गाण्ड की ओर दबा लिया। मुझे गाण्ड के छेद में गुदगुदी सी होने लगी … । गाण्ड के चुदने की याद से ही मेरा बदन आग होने लगा।
“इज्जत लूटने में मजा है … हाय रे भाभी … वो किसी ओर में कहां ?”
“आह्ह्ह्ह , घुस गया रे अन्दर … उईईईईईई … मेरी इज्जत लूट ली रे … !” लण्ड गाण्ड में घुस चला था।
“नहीं मेरी इज्जत लुटी है … भाभी … मुझे आपने लूट लिया … मेरा लण्ड भी ले लिया !” लण्ड का नाम सुनते ही मुझे बहुत अच्छा लगा।
“सुनील … लूट ले रे … मुझे पूरा ही लूट ले … लुटने में मजा आ रहा है !” उसका लण्ड मेरी गाण्ड में घुस चुका था, वो अपना थूक लगाता जा रहा था और गाण्ड में लण्ड अन्दर घुसेड़ता जा रहा था। मुझे तो जैसे सारा जहां मिल गया था।
अभी गाण्ड चुद रही है तो फिर चूत भी चुदेगी, मेरे शरीर को मसल मसल मस्त कर देगा … मेरा सारा पानी निकाल देगा … हाय रे तीन दिनों तक चुदा चुदाकर मुझे तो स्वर्ग ही मिल जायेगा। मुझमें जोश भरता गया। मैं बेसुध हो कर गाण्ड मरवाने लगी … मेरी चूत में आग लगी हुई थी। मेरी चूचियां मसल मसल कर बेहाल हो गई थी, उसके कठोर हाथों ने उसे लाल कर दिया था। उसके लण्ड ने गति पकड़ ली थी। मेरी गाण्ड तबियत से चुदी जा रही थी। मैंने भी अपने चूतड़ हिला हिला कर उसे चोदने में सहायता की। मेरी चूतड़ों के गोल गोल चिकनी गोलाईयों से उसके लण्ड के नीचे पेड़ू टकरा रहे थे … जो मुझे और उत्तेजित कर रहे थे। उसे मेरी तंग गांड चोदने में बड़ा आनन्द आ रहा था पर मेरी तंग गाण्ड ने उसको जल्दी ही चरम सीमा पर पहुंचा दिया और उसका माल छूट गया।
पर मेरी चूत चुदने की राह में पानी छोड़ रही थी। वो मेरी चूतड़ों पर अपना वीर्य मारने लगा और उसे पूरी गीला कर दिया। उसका लण्ड अब सिकुड़ कर छोटा हो गया था। वो पास में पड़ी कुर्सी पर हांफ़ता हुआ सा बैठ गया। मैंने जल्दी से अपना पजामा ऊपर किया और टॉप पहन लिया। थोड़ी ही देर मैंने दूध गरम करके उसे पिला दिया। नई जवानी थी … कुछ ही देर में वो फिर से तरोताज़ा था।
मेरी चूत को अब उसका लंबा और मोटा लौड़ा चाहिये था। उसके लिये मुझे अधिक इन्तज़ार नहीं करना पड़ा।
वह सब अगले भाग में ! Antarvasna Sex Stories
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