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दोस्तो, मेरा नाम रणवीर है, मैं Antarvasna Stories अबोहर(पंजाब) शहर का निवासी हूँ। मैं आज पहली बार अपनी सच्ची कहानी आपके सामने पेश कर रहा हूँ। यह कहानी मेरी गर्लफ्रेंड दीपिका और मेरी है। आपका समय बर्बाद न करते हुए मैं कहानी शुरू करता हूँ।
मैं और मेरी गर्लफ्रेंड दीपिका एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे। हमारी फ्रेंडशिप फ़ोन के जरिये हुई थी। एक महीने तक हमने एक दूसरे को देखे बिना केवल फ़ोन पर ही बात की। आखिर एक दिन हमारे मिलने का समय आ गया, मैंने उसे एक होटल में बुलाया।
वो देखने में इतनी सुन्दर नहीं थी। उसका रंग सांवला था लेकिन उसका फिगर “32-24-36” था। क्या मस्त लग रही थी वो ! उसके स्तन बड़े मस्त लग रहे थे। होटल में हम कुछ देर बैठे और मैंने उसे पहली बार चूम लिया, मैं 15 मिनट तक चूमता रहा और उसके वक्ष भी दबाता रहा। पहली बार मिलने पर तो सिर्फ उसने चूमने ही दिया लेकिन सेक्स के मामले में वो पूरी कठोर थी। कहती थी कि सेक्स तो हम शादी के बाद ही करेंगे !
फिर वो मेरे साथ ही पढ़ने लगी। हम इकट्ठे पढ़ाई के लिए जाने लगे। धीरे-धीरे मेरा उसके घर आना-जाना हो गया। उसके घर में केवल उसकी माँ रहती थी, उसके बाप का देहांत हो चुका था। उसके घर पर मैंने उसे बहुत बार चूमा, थोड़े दिनों के बाद मैं उसके स्तनों पर भी रोज़ किस करने लगा। मैं ही उसे पढ़ाई के लिए उसके घर से लेकर जाता और छोड़ने भी मैं आता। इसलिए मुझे मौका मिल जाता उसे किस करने का।
फिर एक दिन दोपहर का वक़्त था उसने मुझे फ़ोन किया कि रणवीर, मेरे घर पर कोई नहीं है, तुम पढ़ाई करने के बहाने मेरे घर आ जाओ।
मैं कुछ किताबें लेकर उसके घर पहुँच गया ताकि उसके आस-पड़ोस वालों को शक न हो। वो अपने कमरे मैं बैठी थी और उसने लोअर और टीशर्ट पहन रखी थी। बड़ी कयामत दिख रही थी वो ! फिर मैं उसके करीब गया और उसे चूमने लगा और तक़रीबन बीस मिनट तक मैंने उसे किस किया और उसकी चूचियाँ दबाता रहा। वो पूरी तरह गर्म हो गई थी और मुझसे पूरी तरह चिपक गई।
फिर मैंने मौका देखकर उसका लोअर नीचे कर दिया। उसने अन्दर कुछ नहीं पहन रखा था। उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था। मैंने उसकी चूत में उंगली डाल दी। फिर अचानक उसने मुझे अपने से दूर कर दिया और थोड़ा सा नाराज़ हो गई और कहने लगी- शादी से पहले यह ठीक नहीं !
और मैं चला आया वहाँ से।
मैं हर वक़्त उसे चोदने के सपने देखने लगा लेकिन वो तो साली मान ही नहीं रही थी। हमारे परीक्षाएं शुरू होने वाली थी, हमारी दोस्ती को छः महीने से ऊपर हो चुके थे लेकिन मैं अभी तक पूरी तरह चूत भी नहीं देख पाया था। लेकिन वो कहते है ना कि सब्र का फल मीठा होता है।
एक रात के 11 बज रहे थे और हम फ़ोन पर बात कर रहे थे तो मैंने उसे बातों बातों में कहा- दीपिका, मैं तुम्हें चोदना चाहता हूँ !
और वो भी झट से मान गई और कहने लगी- कोई जगह है क्या ?
तो मैंने कहा- हाँ ! मेरे एक दोस्त का कमरा है, वहाँ चलेंगे !
तो उसने कहा- ठीक है ! कल मैं सुबह 11 बजे पढ़ाई के बहाने घर से निकलूंगी और मुझे बता देना कि कहाँ आना है ! लेकिन कंडोम जरुर लेते आना !
मैंने सोचा कि कहीं वो मजाक कर रही है और नहीं आएगी !
लेकिन अगले दिन 11 बजे उसका फ़ोन आया और वो बोली- रणवीर, मैं घर से चल रही हूँ ! बोलो, कहाँ आना है ?
तो उस वक़्त मेरी ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं क्योंकि इससे पहले मैंने कभी किसी को नहीं चोदा था।
वो सही 11-30 बजे मेरे बताये हुए दोस्त के घर पर पहुंच गई। मैं और दीपिका कमरे में चले गए।
सबसे पहले तो मैंने उसे किस किया, वो भी मेरा साथ देने लगी। फिर धीरे-धीरे मैंने उसके सारे कपड़े उतार दिए। अब वो मेरे सामने केवल ब्रा और पैंटी में खड़ी थी और थोड़ा शरमा भी रही थी। फिर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए और केवल अण्डरवीयर में खड़ा था। फिर मैंने उसकी ब्रा को उतार दिया और उसके स्तन चूसने शुरू किये। वो धीरे-धीरे गरम हो रही थी। उसके बाद मैंने उसकी पैंटी में हाथ डाला और उसकी चूत को सहलाने लगा। वो सिसकारियाँ भरने लगी। उसके बाद मैंने उसकी पैंटी भी उतार दी, अब वो मेरे सामने पूरी नंगी थी। उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था, कितनी मस्त चूत थी उसकी गुलाबी रंग की ! हाय !
फिर मैंने उसकी चूत पर अपनी जीभ लगाई तो उसने बड़ी जोर से सिसकारी भरी। मैं उसकी चूत को अपनी जीभ से रगड़ता रहा। उसकी चूत ने जल्द ही पानी छोड़ दिया।फिर मैंने अपना फनफनाता हुआ लंड बाहर निकाला तो वो देखकर डर गई और बोली- इतना मोटा मेरी छोटी सी चूत में कैसे जायेगा ? यह तो मेरी चूत फाड़ देगा ! मुझे तो बहुत डर लग रहा है !
तो मैंने उसे कहा- जान, तुम फिकर क्यों करती हो ! मैं हूँ ना ! मैं बड़े आराम से डालूँगा !
फिर मैंने कंडोम लगाया और उसकी चूत पर प्यार से अपने लंड को रगड़ने लगा। उसने अपनी आँखें बंद कर ली, सिसकारियाँ भरने लगी और कहने लगी- अब नहीं रहा जाता ! चोद दो जल्दी से मुझे। मैंने धीरे धीरे उसकी चूत में अपना लंड डालना शुरू किया। उसकी चूत की सील अभी टूटी नहीं थी इसलिये लंड अंदर घुस नहीं रहा था। फिर मैंने थोड़ा जोर लगाया और सुपारे को अन्दर करते ही उसने जोर से चीख मारी और कहने लगी- रणवीर, अपना लंड बाहर निकालो !बहुत दर्द हो रहा है।
मैंने उसके होंठ चूसने शुरू किये और थोड़ी देर बाद वो शांत हो गई। उसके बाद मैंने दुबारा जोर लगाया तो आधा लंड उसकी चूत में चला गया इस बार तो वो मुझे धकेलने लगी लेकिन मेरे होंठ उसके होंठों पर थे इसलिए वो चिल्ला नहीं पाई लेकिन वो मुझे धकेलने की नाकाम कोशिश करती रही।
उसके बाद उसके दोबारा शांत होने पर मैंने फिर जोर लगाया और इस बार पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया। इस बार तो जैसे उसकी जान ही निकल गई हो और वो रोने लगी लेकिन मैंने उसे दिलासा देते हुए कहा- जान रोओ मत ! बस अब दर्द नहीं होगा।
मैं उसे किस करता रहा, थोड़ी देर बाद वो शांत हो गई और मैं भी अपने लंड को उसकी चूत के अन्दर-बाहर करने लगा। अब उसे भी अच्छा लगने लगा था लेकिन थोड़ा दर्द तो उसे अब भी हो रहा था। फिर मैंने अपने धक्कों की गति बढ़ा दी और करीब बीस मिनट की चुदाई के बाद वो झड़ गई और उसने कस के मुझे पकड़ लिया। मैं भी उसके झड़ने के 5 मिनट बाद झड़ गया और तक़रीबन 15 मिनट हम एक दूसरे के ऊपर ऐसे ही लेटे रहे।
फिर उस दिन मैंने उसे तीन बार चोदा और फिर अंत में हमने एक दूसरे को चूमा और अपने घर आ गए।
उसके बाद मैंने उसे चार बार चोदा। फिर किसी कारण हमारी दोस्ती टूट गई। लेकिन आज भी जब वो मुझे कहीं देखती है तो मुझसे नज़रें नहीं मिला पाती। इसलिए दोस्तो मैं आपको एक हिदायत देता हूँ कि कभी किसी लड़की पर विश्वास मत करो। अगर हम उसे नहीं चोदेंगे तो वो हमें हमेशा धोखा ही देगी। इसलिए जब भी अपनी गर्लफ्रेंड को चोदने का मौका मिले तो उसे गंवाना मत।
और पंजाबी में एक कहावत भी है “सप्प ते फुदी जिथे मिले, मार देओ !”
दोस्तो अन्तर्वासना में मेरी इस कहानी को पढ़ने के बाद मुझे मेल अवश्य करें। Antarvasna Stories
ये बहुत साल पुरानी sex stories बात है। मैं इंडियन आयल नगर, अंधेरी, बम्बई मैं रहता था। मैं १८ साल का था। वो मेरी पड़ोसी, उसका नाम राधिका था पर प्यार से उसे उसके परेंट्स सिया कहते थे।
मैं उसकी और पहले दिन से आकर्षित हुआ था। मुझे कैसे भी करके उसे हासिल करना था। सिया बहुत ही गोरी, स्लिम और सुंदर लड़की थी। और बहुत ही शर्मीली। जब भी हमारी नज़रें मिलती थी वो मुझे बहुत स्वीट स्माईल दे।
मुझे धीरे धीरे ये एहसास होने लगा कि वो भी मुझे चाहने लगी है। हमारे परिवारों में अच्छे रिश्ते थे। इसलिये वो हमारे घर रोज आया करती थी। वो यु पी के माथुर फ़ैमिली से थी और मैं महाराष्ट्रियन। लेकिन फिर भी हमारे परिवार में अच्छे रिश्ते थे।
गर्मी की छूट्टियाँ करने वो अपने बड़े भाई राकेश के साथ दिल्ली अपने मामा के घर जाने वाली थी। मेरी मम्मी मे सिया और उसके भाई को लंच के लिये बुलाया। लंच से पहले हमने चेस कैरम खेले। मेरी नज़र सिया पे ही थी। उसे भी इस बात का पता चला और वो और भी शर्माने लगी।
उसने ब्लू कलर की स्लीवेलेस और स्कर्ट पहनी थी और उसमे और भी फेयर और सुंदर लग रही थी। मैं ने शोर्ट्स और टी-शर्ट पहनी थी। मैं थोड़ा मोटा था। पर उसे फिर भी मैं बहुत पसंद था। वो मेरी और देख कर ही मुस्करा रही थी।
उसे देख कर शोर्ट के अंदर मेरा लंड टोवर जैसा खड़ा हुआ। मैं अपने आप पर कंट्रोल नहीं कर पा रहा था। लंच के बाद मैं ने उसे अपने कॉमिक्स, स्टोरी बुक्स रीडिंग के लिये दिये। उसका भाई राकेश को नींद आने लगी और वो अपने घर चला गया।
मेरी मम्मी बेडरूम मैं आराम करने गयी। मैं और सिया अकेले थे डिन्निन्ग हॉल में। मैं उसके करीब सोफ़ा सेट पे बैठा था। उसे मैं भूखी निगाहों से देख रहा था।
उसने अचानक मुझे कहानी के बारे में कुछ सवाल पूछा और मैं ने उस पल का लाभ लेकर उसके पास गया और उसके दायें गाल को किस किया। उसको किस करने पर मुझे लगा के मैं जन्नत में हूं। उसने अपनी आंखें बंद की और मैं ने उसे फिर से चूमा किया। अब की बार जोश और जोर से.
अब मेरे होश उड़ रहे थे। मैने उसे अपनी बाहों में लिया और उसे सोफ़े पे लिटाया। वो भी बहुत एक्साइटेड थी। हमारे दोनो के लिये पहली बार था।
उसने बहुत प्यार से मेरे बाल को अपने हाथों से संवारा और मेरे माथे को चूमा। बस उसके बाद हम दोनो पर ऐसा जुनून छा गया कि शब्द ही नहीं है बयान करने के लिये। मैं उसके ऊपर लेता और उसे चूमने चाटने लगा।
उसने मेरी शोर्ट्स के अंदर हाथ डाला और मेरा लंड को अपने नाजुक हाथों में लिया और उसके साथ खेलने लगी। मैने अपनी शोर्ट उतार दी और मेरा लंड उसके मुंह में डाल दिया। वो उसे सक करने लगी। मैने उसके मुंह में ही किया जिसे वो पी गयी। अब उसे और भी नशा चढ़ा।
मैने धीरे से उसका स्कर्ट निकाल दिया, उसकी ब्रा भी उतार दी और उसके बूब्स को चूसने लगा। वो बहुत ही एक्साइट हो रही थी और आवाज़ें कर कह रही थी “ओह अजय माय डार्लिंग!
मैं उसके बदन के हर हिस्से हो किस कर रहा था। अब मैं उसके चूत की और आया और उसे कस कर किस किया। मैं उसकी चूत को पागलों की तरह चाट रहा था। वो अब ओर्गास्म के करीब पहुंच हो रही थी। मैं ने अपनी उंगली से उसकी चूत में डाली और वो एकदम से झड़ गयी।
अब मैने अपना लंड उसकी चूत के अंदर डाला। उसका छेद बहुत ही छोटा था क्योंकि वो एकदम कुंवारी थी. वो बहुत तेज़ चिल्लाने लगी। उसे दर्द हो रहा था।
मैने उसे शांत किया और रिलेक्स होने दिया। धक्के देकर मैं धीरे धीरे अपने बड़े से लंड को उसकी चूत में अंदर डाला। वो आनंद से चिल्लायी और मुझे किस करती रही। मैं भी चिल्लाने लगा “मैं तुम्हारे लिये कुछ भी करूंगा”।
उसके बाद हम दोनो एक घंटे तक एक दूसरे की बाहों में सोये और फिर उसकी मम्मी ने जब उसे आवाज़ दी तो वो जल्दी से कपड़े पहन कर के निकल पड़ी। ये था मेरे पहला नशा पहला खुमार पहला जवां प्यार मेरी खूबसूरत पड़ोसन के साथ।sex stories
दोस्तो, अब तक मैं अपनी Hindi Porn Stories चुदाई के दो किस्से लिख चुका हूँ, पहली बार गांड किस तरह सुनसान बाग़ में एक बिहार से पंजाब में काम करने आए हुए एक मोची से करवाई, फ़िर दूसरा लंड भी मोची के साथ में ही कमरे में रहने वाले उसके ही एक दोस्त से उसकी गैर मौजूदगी में लिया।
और फ़िर एक बार आपके सामने अपनी एक और चुदाई पेश करने जा रहा हूँ, तो वैसे भी मैं लड़की ही बन गया हूँ मुझे अलग अलग लंड लेने का चस्का पड़ गया है।
मेरे पापा का दिल्ली से कपड़े ला कर पंजाब में बेचने का है, अब उनके ठीक न होने की वजह से मुझे जाना पड़ता है।
दिल्ली से वापिस आने के लिए इस बार भी मुझे रात को ट्रेन लेनी थी मैंने छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस पकड़ ली। मैं खिड़की के पास अपना बैग रख बैठ गया।
गाजियाबाद स्टेशन से सहारनपुर तक के काफी लोग चढ़ आए। डिब्बा दिल्ली से पीछे से ही भर के आया था।
लगता है बिहार के मर्दों के लंड मेरी गांड की किस्मत में ज्यादा हैं, मेरठ केंट से दो हट्टे-कट्टे फौजी डिब्बे में घुसे।
पैर पे पैर पहले से चढ़ रहे थे, मैं उनके आगे खड़ा था, पहले ही गांड घिसा के मजे ले रहा था, दोनों ने शॉल औढ़ रखे थे।
मेरी गांड उनमें से एक के लंड पे पूरी तरा दबाव डाल रही थी उसका लंड सॉलिड लगा।
उसने पहले ध्यान नहीं दिया पर मुझे कुछ होने लगा, गांड में खुजली मचने लगी।
मैंने गांड को पीछे धकेला और उसके लंड पे घिसा दिया।
उसको अब लगा कि यह माल ही है, उसका अकड़ने लगा।
मैंने फ़िर से गोल गोल गांड को गोल गोल तरीके से घिसाया अभ उसको विश्वास होने लगा कि मैं ख़ुद गांड घिसा रहा हूँ।
उसने मेरी लोई में हाथ डाल अपनी ऊँगली मेरे लोअर के ऊपर से ही मेरी गाण्ड में डाल दी।
मैंने कुछ कहने की बजाये ख़ुद गांड को उसकी ऊँगली की तरफ़ धकेला जिससे ऊँगली अच्छी तरह घुस जाए।
उसने पीछे खड़े दूसरे फौजी को सब बता दिया, दूसरा वाला भी मेरे पीछे ही खड़ा हो गया।
पहले वाले ने ऊँगली देनी चालू रखी दूसरा पास आ बोला- बहुत भीड़ है!
मैंने कहा- हाँ!
‘कहाँ से हो?’
मैंने कहा- पंजाब!
‘ओह हमें भी अमृतसर जाना है, फ़िर तो पूरे सफर के साथी हो।’
पीछे वाला कान के पास आकर बोला- अच्छा लग रहा है?
बहुत अच्छा!
इतनी भीड़ में नीचे किसी का ध्यान न था। दूसरे वाला मेरे सामने खड़ा हो गया।
उसके और मेरे चेहरे में बहुत कम फासला था।
हवा में चुम्बन देकर आंख मारते हुए मेरा हाथ पकड़ अपनी लोई में ले गया उसने जिप खोल मेरा हाथ अपनी पैंट में घुसा दिया, मैं उसका लण्ड सहलाने लगा।
पीछे वाला अन्दर हाथ डालना चाहता था लेकिन मैंने आगे से इलास्टिक की गांठ खोल दी। उसने इलास्टिक खींच ली और मेरा लोअर नीचे खिसका मेरी गांड पे हाथ फेरने लगा, थूक लगा ऊँगली डाल दी।
आगे वाले के लंड को मैं प्यार से सहला रहा था।
तभी सहारनपुर आने वाला था, आधे से ज्यादा डिब्बा यहीं खाली होने वाला था।
लोग सीट से उठ खिड़की की तरफ़ बढ़े, हम तीनों कपड़े ठीक कर साइड पे खड़े हो गए।
काफी सीट खाली हुई लेकिन कोई तीन लोगों का एक साथ बैठने वाली नहीं।
ट्रेन चली, हम तीनों बैठ गए अलग अलग! मायूस!
तभी आधे घंटे में जगाधरी आया और डिब्बा लगभग खाली ही हो गया, बैठने क्या लेटने के लिए एक केबिन तो पूरा खाली था।
इसके बाद सीधा अम्बाला में गाड़ी रुकनी थी, हमने बैग सीट पे रख लिए।
उनमें से एक ने अपना बिस्तर-बंद खोल नीचे फ़र्श पर बिस्तर लगा लिया।
दोनों एक तरफ़ मुँह कर लेट गए।
मैं बीच में उनकी पैर की तरफ़ मुँह करके लेट गया। मैं इकट्ठा सा हो अपना मुँह उनकी जांघों तक ले आया।
दोनों ने लंड निकाल रखे थे, मैं आराम से चूसने लगा।
उन दोनों ने मेरी गाण्ड नंगी कर दी और सहलाने लगे।
वो बोला- यार तेरी गांड मारनी है, कैसे मारूँ? यह चूसना वगैरा तो अन्दर छिप के हो जाता है।
तभी हमने फैसला किया कि सामने वाली सिंगल सीट पे उनमें से एक बैठेगा ताकि कोई आए तो वो बोल दे!
मैं उल्टा होकर लेट गया, पूरा घोड़ा नहीं बना। गांड थोडी सी ऊपर कर दी, उसने पीछे से अपना मजबूत लंड को थूक लगा धक्का दे थोड़ा अन्दर किया।
फौजी का लंड था, फाडू तो होगा, मैंने सह लिया।
उसने अहिस्ता से सारा पेल डाला और चोदने लगा।
मैं भी गांड धकेल धकेल के चुदने लगा।
दूसरा उठा और पूरे डिब्बे का मुआयना करके आया, सामने घुटनों के बल बैठ गया। मैंने उसका लंड मुँह में लिया। अब मैं पीछे से गांड आगे से मुँह चुदवा रहा था।
तभी उसने तेज धक्के मारने चालू किए, किसी के आ जाने के डर से उसने जल्दी ही अपना सारा गाढ़ा माल धार से उगल दिया।
तभी दूसरे वाला पीछे आया, पहला फ़िर डिब्बा देखने गया। दूसरे वाले ने मुझे अपने लण्ड पे बिठा लिया और मैं उछल उछल के चुदने लगा। हाय! क्या लण्ड है तेरा! फाड़ डाल आज मेरी गांड! लगा दे फौजी वाला दम!
उसने एक दम से मुझे अपने नीचे डाल लिया, दोनों टांगें कंधों पे रख कर चोदने लगा।
मुझे यह तरीका सबसे अच्छा लगता है क्यूंकि नंगे मर्द के नीचे लेटने से मुझे बहुत सुख मिलता है।
यह ज़बरदस्त खिलाडी था ज़ोर ज़ोर से चोदते चोदते उसने एक ज़बरदस्त धक्का मारा और सारा पानी मेरी गांड में डाल दिया, मेरे ऊपर लुढ़क गया।
हम तीनों ने अपने कपड़े ठीक किए। वैसे भी लुधियाना आते ही डिब्बे में चाय वाले घुस गए। हमने चाय पी, दोनों ने मुझे अपने बीच बिठा रखा था मुझ से लण्ड सहलवा रहे थे।
ट्रेन चलते ही, अब यह जालंधर रुकेगी, दोनों ने मुझे फ़िर से पकड़ लिया और चोदने लगे। दूसरे वाले को ज्यादा मजा आ रहा था तभी उसने लगतार दो शिफ्ट लगाने की सोची। दोनों मुझे एक एक बार फ़िर चोदने के बाद भी नहीं रुके, बोले- अब अमृतसर रुकेगी!
मैंने सोचा- ले सनी! तेरी गांड तो ये दोनों सुजा के घर भेजेंगे। वो थे ही इतने हट्टे-कट्टे!
ब्यास से ट्रेन चली ही थी कि दोनों ने फ़िर लण्ड निकाल लिए। अब कोई कम्बल नहीं था। वो दोनों सीट पे बैठ गए, मैं नीचे घुटनों पे बैठ बारी बारी से दोनों के लंड चूसने लगा। इस बार मैंने दोनों बाहें सीट पे रख गांड उनकी तरफ़ घुमा ली, उसने डाल दिया।
अमृतसर आने तक रेल में वो मेरी गांड की रेल बना रहे थे। रात के साढ़े दस बजे से उनके लंड कभी मेरे हाथ में, कभी मुहं में, कभी गांड में!
दोनों ने मुझे बहुत ज़ोर लगाया कि मैं उनके साथ केंट में उनके क्वार्टर में चलने का।
मैंने कहा- अपने मोबाइल नम्बर दे दो, मैं कॉल कर लूँगा, तभी प्रोग्राम बना के में आपके सरकारी क्वार्टर में चुदने आ जाऊँगा।
दोनों ने मिलकर मुझे वो सुख दिया जो एक हफ्ते से मेरी गांड को नहीं मिला था। मेरी गाण्ड की सारी खुजली मिटा डाली।
जाते वक्त बोले- और भी लंड तेरी गांड में घुसवाएँगे!
दोस्तो, यह थी मेरी एक और चुदाई की कहानी! Hindi Porn Stories
मेरा नाम राहुल Sex stories है। मैं अभी बंगलौर में रहता हूँ, रंग गोरा, 5’6′, 24 साल, ग्रेजुएट।
यह मेरा पहला संदेश है आप लोगो के लिए। इसका मतलब यह नहीं कि यह मेरा पहला सेक्स अनुभव है। इससे पहले मैंने बहुत सेक्स किया है लड़कियों और आंटियों से।
जो लड़कियाँ मेरे साथ सेक्स में रात गुजारती, वो मेरे साथ शहर में घूमने के लिये भी ख्वाहिश रखती थी।
यह घटना तीन साल पुरानी है, तब अपने परिवार के साथ मैं मेडिकल कालोनी में रहता था और इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था।
तभी मेरे पड़ोस में एक परिवार का आगमन हुआ। परिवार में पति, पत्नी और एक तीन साल का बच्चा। वैसे भी कालोनी में और भी कई भाभियाँ थी पर नई भाभी के सामने सब फ़ीका पड़ने जैसा लगता। चूंकि वो नये थे तो मैं कभी कभी उनका सामान मार्केट से ला लेता। मुझे घूमने का मौका मिल जाता और भाभी को देखने का और कभी कभी थोड़ा थोड़ा छूने का भी।
ऐसे ही एक महीना बीत गया और भाभी हमारे घर के सदस्यों के साथ भी घुलमिल गई। उनके पति और पापा में भी गहरी दोस्ती हो गई।
एक दिन एक शादी में हमें और भाभी को भी न्यौता मिला था पर मम्मी को कुछ काम था सो भाभी ने भी जाने के लिये मना कर दिया। सो पापा और भैया (भाभी के पति) चले गये।
पार्टी कालोनी से तीस किलोमीटर की दूरी पर थी और आते वक्त जोर की बारिश के वजह से पापा ने रात के करीब नौ बजे मम्मी को फोन करके कहा- राहुल को भाभी के घर जाकर सोने के लिये कह देना।
फ़िर क्या, मैं खाना खाकर दस बजे भाभी के घर चला गया। घंटी बजाई और भाभी ने झट से दरवाज़ा खोल दिया।
तभी मैं भाभी को देख कर दंग रह गया। गोरी चिट्टी, लम्बे घने बाल, वक्ष आगे जितना, गांड उतनी पीछे, मतलब 36-30-36 और कद होगा 5’3′, इतने सही फ़ीगर के साथ साथ काली नाइटी, जैसे लगा कि आसमान की कोई परी नीचे घूमने आई हो।
हम दोनों अंदर आ गये, भाभी ने कहा- तुम बैठो, मैं दूध लाती हूँ!
मैं वहीं सोफ़े पर बैठ गया। थोड़ी देर में भाभी दूध लेकर आई, एक गिलास मुझे दिया और एक गिलास खुद लेकर मेरे पास सोफ़े पर बैठ गई।
और हम एक अंग्रेजी फ़िल्म देखने लगे जिसमें सिर्फ़ 2-3 चुम्बन-दृश्य ही थे। अचानक उन्होंने मुझसे पूछा- क्यों राहुल, तुमहारी कोई गर्लफ़्रेंड है या नहीं?
मैं घबरा गया कि भाभी क्या पूछ रही हैं क्योंकि इससे पहले कभी ऐसी बात हमारे उनके बीच में नहीं हुई थी।
मैंने इंकार में सर हिला दिया तो कहने लगी कि तुम तो लड़कियों की तरह शरमा रहे हो।
मैंने कहा- नहीं भाभी, ऐसी कोई बात नहीं है।
तो उन्होंने कहा- एक बात बताओ, तुमने आज तक कभी किसी लड़की या औरत को नंगा देखा है?
तो मैंने जान बूझकर कहा- नहीं भाभी! आज तक नहीं देखा है।
वो मेरे बगल में बैठी थी और जब बातें कर रही थी तो मैं बार बार उनके मम्मो की तरफ़ देख रहा था, भाभी ने भी मुझे देखते हुए देख लिया था।
वो बोली- अगर देखना है तो मुझसे कहो, मैं तुम्हें ऐसे ही दिखा दूँगी।
मैं घबरा गया कि भाभी क्या बोल रही है।
उसके बाद भाभी ने मेरे चेहरे पर हाथ रखते हुए बोला- कभी किसी के साथ कुछ किया है या नहीं?
तभी मेरे अंदर का जानवर जाग गया तो मैंने भाभी से कहा- कि मैं आपको चूमना चाहता हूँ।
और कहते हुए उनके चेहरे को अपने तरफ़ खींच कर उनके होंठों पर चुम्बन करने लगा।
उनके होंठों बहुत ही नशीले थे, मैं उनके होंठों को चूसने लगा और भाभी मेरे होंठों को चूसने लगी। दोनों करीब दस मिनट तक ऐसे ही चूमा-चाटी करते रहे।
उसके बाद भाभी बोली- तुम तो कह रहे थे कि तुमने कभी कुछ नहीं किया है लेकिन तुम्हें देखकर लगता नहीं है कि तुमने कभी कुछ नहीं किया है?
मैं कुछ नहीं बोला और भाभी की नाइटी एक बटन को खोलकर उनके मम्मे को हल्का हल्का दबाने लगा। उनको भी अच्छा लग रहा था इसलिये कुछ नहीं बोली।
फिर मैंने उनकी नाइटी को पूरा खोल दिया तो भाभी कहने लगी- तुम तो बहुत तेज हो, पहले तो तुमने चुम्बन करने को कहा और अब मेरे मम्मे दबाने लगे?
मैंने कहा- भाभी, आप बहुत खूबसूरत हो और मैं आपको चोदना चाहता हूँ।
कह कर भाभी के एक मम्मे पर अपना मुँह लगाकर चूसने लगा और दूसरे मम्मे को अपने हाथ से दबाने लगा। भाभी भी मस्ती में आकर ऊऊउह्हहाआआ.. और जोर से चूसो.. सीतु .. बहुत अच्छा लग रहा है.. चूसते रहो.. ऊऊऊह्हाआआआ… मजा आ रहा है.. जोर से चूसो… और जोर से।
मैं अपने पूरे जोश से भाभी के मम्मे को चूसने लगा, तब तक वो सिर्फ़ पैंटी में ही रह गई थी, मम्मे चूसते हुए मैंने अपने हाथ से उनकी जांघों को सहलाने लगा। तब तक भाभी मस्त हो चुकी थी, भाभी की जांघों को सहलाते हुए मैं उनकी चूत को भी हल्के हल्के सहलाने लगा, भाभी मस्ती में आअह्हह ह्हहह्ह ऊऊउफ़्फ़फ़ जैसी आवाजें निकाल रही थी।
एक तरफ़ उनके एक मम्मे से दूध निकल रहा था और दूसरी तरफ चूत में ऊँगली डालने से उनकी चूत गीली हो गई थी।
फ़िर मैंने उसको लिटा कर उसके पेट पर चूमना शुरू किया और उनके चूत के अंदर अपनी जीभ को डालने लगा और उनकी चूत को मैंने अच्छी तरह चाटा।
भाभी मेरे होंठों से अपने योनिरस को चाट कर कहने लगी- तुमने तो अपना काम कर दिया, अब देखो मैं क्या करती हूँ।
भाभी ने मेरे कपड़े खोल कर लण्ड की टोपी पर ज़ुबान फेरनी शुरू की, फिर धीरे धीरे पूरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया और लॉलीपोप की तरह चूसने लगीं। भाभी बहुत अच्छा लण्ड चूस रही थी। मैं तो उस वक्त मज़े और आनन्द की ऊँचाई पर था।
भाभी ने पहले आहिस्ता और फिर तेज़ी से लण्ड चूसना शुरू कर दिया।
फ़िर भाभी ने मेरा लण्ड अपनी चूत पर रखा मैंने एक हल्के झटके के साथ अपना लण्ड उनकी चूत में डाल दिया। उनकी चूत पहले ही गीली हो रही थी इसलिये पूरा लण्ड बड़ी आसानी से उनकी चूत में चला गया। पहले तो मैं भाभी को आहिस्ता आहिस्ता चोदता रहा फिर मैंने अपनी चोदन-गति तेज़ कर दी और भाभी को शक्ति से चोदने लगा।
भाभी चुदाई का पूरा मज़ा ले रही थीं और आआअह्ह.. ऊओह्हह्ह.. ऊउफ़्फ़फ़्फ़.. ह्हहयययईए.. और तेज़.. प्लीज़ ..तेज़ ..उफ़्फ़फ़्फ़ ऊऊह्हह्ह की आवाज़ें निकाल रही थीं।
उनके स्तन हर झटके के साथ हिल रहे थे जो एक हसीन और दिलकश नज़ारा था।
कुछ देर के बाद मैंने भाभी को घोड़ी बनाया तो उनकी खूबसूरत और चौड़ी गांड ऊपर को उठ आई और उनके चूचे किसी आम की तरह लटकने लगे। मैंने भाभी की गांड पर हाथ फेरते हुये लण्ड उनकी चूत में डाल दिया और उनके चूचे पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से झटके लगाने लगा। मैं भाभी को जी-जान से चोद रहा था और भाभी भी चुदाई में भरपूर साथ दे रही थी।
काफ़ी देर चुदने के बाद भाभी ठंडी पड़ गई, मैं भी अपने चरम पर था, मैंने भाभी को कहा- मैं छूटने वाला हूँ।
तो उन्होंने कहा- कोई बात नहीं, तुम मेरे अंदर ही निकालो।
मेरे लण्ड से वीर्य का फ़व्वारा निकला और भाभी की चूत वीर्य से भर गई। मैं थक कर भाभी के ऊपर लेट गया।
थोड़ी देर बाद मैंने लण्ड भाभी की चूत से निकाला जो वीर्य और भाभी के रस से सना हुआ था। भाभी ने फिर मेरे लण्ड को चाटना शुरु कर दिया और इसे बिल्कुल साफ़ कर दिया।
अब भाभी ने कहा- राहुल, तुम तो बहुत एक्सपर्ट लगते हो, मुझसे पहले कितनी के साथ चुदाई कर चुके हो?
मैंने कहा- भाभी चुदाई तो 14-15 के साथ की है लेकिन जैसे मम्मे आपके हैं वैसे मम्मे मैंने आज तक नहीं चूसे हैं, आपके मम्मे बहुत टेस्टी हैं।
यह कहते हुए मैंने झटके से अपनी ऊँगली फ़िर से उनकी चूत में डाल दी और भाभी स्ससा आआआ करती रही, बहुत अच्छा लग रहा है।
और फिर मैंने भाभी की तरीफ़ की कि सच में आप बहुत खूबसूरत हो तो भाभी ने मुझसे कहा- यह क्या भाभी-भाभी लगा रखा है, पहले यह बताओ कि तुम मुझे रात भर चोदोगे या नहीं?
यह सुनकर तो मुझे और भी खुशी महसूस हुई। इसका मतलब यह नहीं कि मैंने और किसी के साथ रात नहीं गुजारी है। मैंने तो पिछले चार सालों से कितनी अपनी क्लासमेट के साथ रात गुजारी है पर भाभी के जैसा जोश और किसी में मैंने नहीं देखा था इसलिये मुझे बहुत खुशी महसूस हो रही थी।
मैंने उनसे कहा- मैं आपको दूसरे आसन से चोदना चाहता हूँ।
तो बोली- कौन से तरीके से चोदोगे अब मुझे?
मैंने कहा- आप ज़मीन पर लेट जाइए और अपने पैरों को उठा लीजिये।
उन्होंने ऐसे ही किया, मैं उनके पैरों के बीच में गया और उसको फ़ैला कर अपने दोनों कंधों पर रख कर उनकी फ़ुद्दी के छेद पर अपना लण्ड रखकर धक्के मारने लगा। इस तरीके से उन्हें भी अच्छा लगा, बोली- बहुत मजा आ रहा है मेरे राजा, जैसे चोदना हो चोदो मुझे!
मैंने करीब दस मिनट तक चोदने के बाद चूत से लण्ड को निकाल कर गांड में डाल दिया और चोदने लगा।
मैं इसी तरह हर पाँच मिनट के बाद चूत और गांड की चुदाई करता रहा। लगभग 25-30 मिनट तक इसी तरह चोदने के बाद मैं बोला- मैं अब झड़ने वाला हूँ। तुम बताओ कि मेरे लण्ड का पानी कहाँ लेना चाहती हो, अपनी चूत में या गांड में?
उन्होंने कहा- तुम मेरी गांड में ही पानी निकाल दो, चूत में तो तुम पहले भी निकाल चुके हो।
फ़िर मैंने अपना सारा अनमोल रतन उनकी गांड में डाल दिया और बेड पर आकर लेट गया। तभी उन्होंने मेरे होंठों पर जोर से किस किया और कहने लगी- जो मजा तुम्हारे साथ आया है वो मुझे उनके साथ नहीं आता है।
सुबह को भाभी ने कहा- मेरी चूत और गांड में दर्द बहुत हो रहा है लेकिन इस चुदाई से जो मज़ा मिला उसके आगे यह दर्द कुछ भी नहीं।
फ़िर मैं अपने घर आ गया और जब भी मुझे मौका मिलता मैं भाभी की चुदाई करता रहा।
भाभी की चुदाई करके हर बार मुझे एक अलग सा खुशी मिलती थी क्योंकि भाभी है ही इतनी सेक्सी! Sex stories
मेरी उम्र २५ साल है, पेशे Sex Stories से एक डॉक्टर हूँ। कॉलेज ख़तम किये छः महीने ही हुए हैं। मैंने अपनी डिग्री शिमला से की है। मैं कॉलेज से ही उम्र में बड़ी उम्र की औरतों का बहुत शौकीन हूँ।
एक बार मैं घर से शिमला जा रहा था बस में। रास्ते में एक बहुत खूबसूरत लड़की बस में चढ़ी और मेरे सामने वाली सीट पर बैठ गई। रंग एकदम गोरा और भरी भरी काया ! बस फिर क्या था, मैं सोचने लगा कि कैसे उसके साथ बैठूं !
एक स्टाप पर जाकर जब बस रुकी तो मैं कुछ लेने के बहाने बस से उतरा और उसे कहा कि मेरी सीट का ख्याल रखे। पर जब मैं वापिस चढ़ा तो वहाँ कोई मोटा सा अंकल बैठा हुआ था। बस मैं उसे भला बुरा कहता हुआ उस लड़की के साथ बैठ गया।
अब वो मुझे घूर कर देखने लगी। मैं भी चुपचाप उसे अनदेखा करके बैठ गया। फिर धीरे से उसकी तरफ देखा, उसके स्तन उसके बिन बाजू के ब्लाऊज़ से दिख रहे थे। मैं अपने आप पर काबू न कर पाया और मेरा लण्ड झटके मारने लगा।
पर जैसे उसने मुझे घूर कर देखा, मेरी हिम्मत नहीं हुई दोबारा उसकी आँखों में देखने की।
करीब एक घंटे बाद उसने मुझे खुद बोला- मैंने आपको पहले कहीं देखा है !
मैं सकपका गया। मैंने पूछा- कहाँ?
वो बोली- नहीं जानती, पर देखा ज़रूर है।
मेरे दिल में ख़ुशी के लड्डू फूट रहे थे।
मैंने उसे कहा- शायद आपने मुझे मेडिकल कॉलेज में देखा होगा।
तब वो बोली- हाँ ! मैं अपनी बहन को चेक करवाने आई थी।
बस फिर क्या था, बातों का सिलसिला शुरु हो गया। अब मैं समझा कि वो मुझे घूर कर देख नहीं रही थी बल्कि पहचानने की कोशिश कर रही थी।
जब उसने मुझे बताया कि वो दो बच्चों की अम्मा है तो मैं हक्का-बक्का रह गया।
फिर उसने मुझे अपनी सारी कहानी सुनाई कि कैसे उसकी शादी छोटी उम्र में हो गई और उसका अकेलापन।
जैसे कोई मरीज डॉक्टर से कोई बात नहीं छुपाता वैसे ही वो अपनी हर बात बताती गई!
और मैं भी एक अच्छे डॉक्टर की तरह उसकी हर बात सुनता गया।
जब वो बस से उतरी तो उसने मुझे अपना फ़ोन नम्बर दिया और अपने घर की तरफ चली गई और मैं अपने हॉस्टल की तरफ !
तब तक मेरे दिमाग में कुछ भी उल्टा सीधा नहीं था। अब घर से इतने दिनों बाद आया था तो दोस्तों के साथ मिलकर शाम को थोड़ी सी शराब पी ली और फिर अपने कमरे में सोने चला गया। तभी मेरी आँखों के सामने नीरू का चेहरा घूमने लगा (नीरू जो लड़की मुझे बस में मिली) उसके गोल मटोल स्तन, उसकी दिल को चीर देने वाली हँसी, उसका भोला सा चेहरा और उसकी भारी गाण्ड ! यह सब मेरी आँखों के सामने घूमने लगे।
मैंने मोबाइल निकाला और लगा दिया नंबर !
रात के १२ बज रहे थे, मैंने सोचा कि वो सो गई होगी तो मैंने फ़ोन काट दिया।
थोड़ी देर बाद उसका फ़ोन आया और मुझे पूछने लगी कि फ़ोन क्यूँ किया?
मैंने कहा- बस तुम्हारी याद आ रही थी, इसलिए कर लिया। पर सॉरी मुझे समय का ख्याल नहीं रहा !
वो बोली- नहीं ! मैं जाग रही थी !
मैंने पूछा- वो क्यूँ?
वो बोली- बस मुझे भी तुम्हारी याद आ रही थी !
बस मेरा मन खुश हो गया। थोड़ी देर और बातें चली और उसने बताया कि वो अकेली सोती है अपने पति के साथ नहीं।
इस तरह मैंने उसे अगले दिन मिलने के लिए बुला लिया।
वो दूसरे दिन ठीक मेरे बताये हुए समय पर पहुँच गई जब हॉस्पिटल बंद होने का वक़्त होता है।
मैंने उससे पूछा- कहाँ चलें?
वो बोली- तुमने बुलाया है ! तुम हो ले चलो कहीं भी !
मैं अपनी फुद्दुपंथी पे इतना पछताया कि किसी कमरे का इंतजाम भी नहीं किया था मैंने।
मैंने नहीं सोचा था कि वो आते हो मुझसे ऐसे बोलेगी, पर क्या कर सकते थे, मैं उसे हॉस्पिटल के पीछे एक सुनसान जगह पर ले गया और कहा- तुम बहुत खुबसूरत हो नीरू ! मैं तुम्हें चाहने लगा हूँ !
तो वो यह बात सुन कर डर गई और बोली कि उसके दो बच्चे हैं और वो उनसे बहुत प्यार करती है। वो इन बन्धनों से बंधी हुई है।
पर मेरे उसे समझाने पर कि मैं किसी को नहीं पता लगने दूंगा हमारे बारे में, उसने मुझे चूमने दिया। धीरे धीरे मैं उसके वक्ष को चूमने लगा। मुझे पता हो नहीं चला कब मेरा हाथ उसके पिछवाड़े पर चला गया और वहां उंगली करने लगा।
वो बहुत उत्तेजित हो गई थी। वो मुझसे छिटकते हुए बोली- बस, बहुत हो गया ! तुम हद पार कर रहे हो !
वैसे बात भी सही थी, वहां कोई भी आ सकता था। मैंने उसे जाने दिया और वो भागते हुए वहाँ से चली गई।
फिर रात को मैंने उसे फोन किया और अपने किये पर सॉरी बोला। उसे मिलने के लिए बुलाया फिर से !
पहले तो उसने ना-नुकुर की पर उसके दिल में जो मेरे लण्ड को चखने की चाह थी, शायद वोही खाज उसे मेरे पास मिलने के लिए ले आई।
इस बार मैं पूरी तरह से तैयार रहना चाहता था। वो बुधवार का दिन था और मैं बुधवार को नॉन-वेज़ खा लेता हूँ। वो आई और चुपचाप मेरे साथ चलने लग पड़ी। हम मेरे दोस्त के कमरे पर पहुंचे, हॉस्टल तो ले जा नहीं सकता था नहीं तो जोर आजमाइश वाला चोदन हो जाता उसका।
कमरे पर पहुँचते हो मैंने उसका पर्स एक कोने में फ़ेंक दिया और उसे अपनी बाँहों में भर लिया। वो थोड़ा शरमाई।
मैंने पूछा तो बोली- डर लगता है !
मैंने उसे कहा- दो बच्चों की माँ होकर डर लगता है तुझे?
तो बोली- यह बात नहीं है ! डर लगता है कहीं तुमसे प्यार न हो जाए !
मैंने उसे समझाया कि डरने की कोई ज़रूरत नहीं है, देख, मैं ठहरा अकेला लोंडा अभी, और कल को मेरी शादी हो जायेगी, और मैं हूँ डॉक्टर तो सोसाइटी में तो कभी नहीं पता लगने दूंगा। बाकी सब तुम पर है कि तुम सुख चाहती हो या नहीं !
वो यह सब सुनते हो मेरी बाँहों में लिपट गई, मैंने उसे चूमना शुरू कर दिया और न जाने कब उसके स्तन मेरे हाथों मैंने आ चुके थे, और मैं पहुँच गया स्वर्ग वाटिका में।
धीरे-धीरे मेरा हाथ उसके नाड़े की तरफ बढ़ गया। मैंने हलके से उसका नाड़ा खींच दिया। जिस काले सूट की मैं तारीफ कर रहा था वो अब बेडशीट का काम कर रहा था और उसकी लाल कच्छी आवाज़ दे दे कर मुझे बुला रही थी कि आओ और मुझे उधेड़ दो।
मेरे लण्ड का आकार जो कभी ७ इंच से बड़ा नहीं हुआ था, आज १ इंच ज्यादा होने की दौड़ में था।
वो मेरे ऊपर अपने भारी पिछवाड़े को सटा कर बैठी हुई थी। मैंने उसके नंगे स्तन अपने मुँह में लेकर जैसे हो चबाये कि वो सिस्कारियां भरने लगी, उसकी ऐसी आवाजें सुनकर मेरा बुरा हाल हो गया। मेरा लण्ड तो मानो जैसे सुन्न हो गया। बस मुझे तो उसका भरा हुआ शरीर ऐसे लग रहा था कि एक एक हिस्सा खा जाओ।
उसकी मेमने की तरह गदराई हुई फुदी के सुनहरे बाल !
उन्हें अपनी जीभ से सहलाते हुए मैं फुदी के द्वार पर पहुंचा, पर वहीं पर उसने मुझे रोक लिया और वो सी सी सी करती हुई मुझसे लिपट गई, मेरे कान में धीरे से फुसफुसाती हुई बोली- इतनी ख़ुशी इकट्ठी मत दो कि मैं संभाल न पाऊँ !
इससे पहले वो कुछ और बोल पाती उसकी आँखों से आंसू बह निकले, उधर आँखों से आंसू और इधर फुदी से आंसू !
अब मैं समझ नहीं पा रहा था मैं किन आंसुओं पर ध्यान दू..
फिर मैंने चुने फुदी के आंसू और अपनी दो उँगलियों से उसकी फुदी सहलाने लगा और उसे औंधे मुंह लेटा कर अपना लण्ड-बाबा उसकी फुदी पे लगाया। मेरा लण्ड उसके अंदर जाता गया और वो मेरी तरफ धक्के लगाते हुए और अंदर अंदर, बस थोड़ा और, सी सिस इस सी ,, उईईईम उइंमा बस थोड़ा और बस थोड़ा और,,,, आज मुझे मत छोड़ना अधूरी….
मैं बरसों की प्यासी हूँ ! मुझे भर दो अपने गरम लौड़े से…
इतना कुछ सुनने के बाद भी मेरा लण्ड था कि बस लगा हुआ था बुरी तरह से… तभी नीरू पूरा जोर लगा कर मुझे अपनी और खींचने लगी… मैं समझ गया कि वो झड़ रही है… मैंने सोचा फटाफट अपना काम भी निपटा लो वरना फिर उसे पता नहीं कब इतनी पॉवर आये, पहले तो मैं उसे खाना चाहता था, पर अब शायद वोही मुझे खा रही थी… उसकी सिस्कारियों के दौरान मेरी चमड़ी पे उसने अपने नाखूनों से कई घाव कर दिए थे, बहुत जंगली थी वो…
तो दोस्तो, मैंने कई बार मजे लिए उससे पर मैं उसे आज भी नहीं भूल पाया हूँ….. वो जहाँ भी रहे खुश रहे…हमे मिले हुए पूरा एक साल हो गया है… मैं आज भी उसे याद करता हूँ… और इसी तलाश में हूँ कि वैसी कोई मस्त फुदी फिर मिल जाए …
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